Gumla: जिले के आकांक्षी प्रखंड डुमरी अंतर्गत औरापाट मॉडल गांव में संचालित मशरूम आजीविका परियोजना अब सफलता की नई कहानी लिख रही है. जिला प्रशासन की पहल और उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित के मार्गदर्शन में शुरू हुई इस योजना ने ग्रामीणों को न सिर्फ रोजगार का नया जरिया दिया है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी आगे बढ़ाया है.
पहले चरण में मिली बड़ी सफलता
परियोजना के पहले चरण में औरापाट गांव के 45 परिवारों को जोड़कर मशरूम उत्पादन की शुरुआत की गई थी. इस दौरान APP एग्रीगेट के माध्यम से करीब 6 से 7 लाख रुपये मूल्य के मशरूम का विपणन किया गया. खास बात यह रही कि उत्पाद सीधे लाभुकों से खरीदे गए, जिससे उन्हें तत्काल आर्थिक लाभ मिला और बाजार की समस्या भी खत्म हुई.
दूसरे चरण में लाभुक बने आत्मनिर्भर
इस योजना की सबसे बड़ी सफलता यह है कि अब दूसरे चरण में लाभुक खुद अपने संसाधनों से उत्पादन किट खरीदकर मशरूम की खेती कर रहे हैं. इससे साफ है कि ग्रामीणों का इस योजना पर भरोसा बढ़ा है और वे इसे स्थायी आजीविका के रूप में अपना रहे हैं.
कम लागत में बेहतर आय का जरिया
लाभुक परिवारों का कहना है कि कम लागत, सीमित जगह और कम समय में अच्छी आय मिलने के कारण मशरूम उत्पादन उनके लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रहा है. कई परिवार लगातार उत्पादन कर अपनी आमदनी में इजाफा कर रहे हैं और आर्थिक रूप से मजबूत बन रहे हैं.
प्रशासन का सहयोग और व्यवस्था
जिला प्रशासन की ओर से इस योजना के तहत तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण और विपणन की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, जिससे ग्रामीणों को हर स्तर पर सहायता मिल रही है.
जिले में बना सफल मॉडल
औरापाट गांव की यह पहल अब पूरे जिले में आजीविका संवर्धन का सफल मॉडल बन चुकी है. अन्य गांवों के लोग भी इससे प्रेरित हो रहे हैं और प्रशासन आने वाले समय में इस मॉडल को और विस्तारित कर ज्यादा से ज्यादा परिवारों को जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है.
