NewsWave एक्सपोजः जंगल के रक्षकों पर दागः झारखंड के वो IFS, जिनकी फाइलों में उलझा जंगल और जमीन

रांचीः झारखंड में जंगल के प्रहरियों पर ही जंगल को निगलने के गंभीर आरोप लगे हैं. राज्य गठन से लेकर अब तक...

रांचीः झारखंड में जंगल के प्रहरियों पर ही जंगल को निगलने के गंभीर आरोप लगे हैं. राज्य गठन से लेकर अब तक एक दर्जन से अधिक भारतीय वन सेवा के अधिकारियों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति, एसीबी की कार्रवाई और विभागीय अनियमितताओं के मामले दर्ज हुए हैं. इनमें से कुछ को जेल की हवा खानी पड़ी, तो कुछ की पदोन्नति फाइलों में दबकर रह गई. वन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारियों पर कैम्पा फंड के दुरुपयोग, आय से अधिक संपत्ति और अवैध खनन में मिलीभगत जैसे गंभीर आरोप लगे हैं.

वर्तमान पीसीसीएफ भी आरोपों से जुदा नहीं

वर्तमान में राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजीव कुमार भी आरोपों से जुदा नहीं हैं. जब वे चाईबासा में डीएफओ थे, तब उन पर आरोप लगा था कि उन्होंने केंद्र सरकार के भूमि के बदले भूमि नियम की अनदेखी करते हुए एक बड़ी स्टील कंपनी को फायदा पहुंचाने की कोशिश की. संजीव कुमार पर आरोप था कि उन्होंने स्थल निरीक्षण किए बिना ही 116.742 हेक्टेयर भूमि को गैर-वन भूमि के रूप में सत्यापित कर दिया था, जबकि वह जमीन वास्तव में वन क्षेत्र का हिस्सा थी. हालांकि संजीव कुमार ने इन आरोपों को यह कहते हुए नकारा था कि उन्होंने खतियान के आधार पर राजस्व अधिकारियों की रिपोर्ट को ही आगे बढ़ाया था.

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जानिए अब तक किन अफसरों पर क्या लगे आरोप

• राजीव रंजन: पूर्व पीसीसीएफ, जिन पर पद के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे.

• एके मल्होत्रा: कैंपा फंड के आवंटन और खर्च में अनियमितताओं को लेकर जांच के घेरे में रहे.

• कन्हैया लाल: पौधारोपण योजनाओं और कैम्पा मद की राशि के संदिग्ध उपयोग के आरोप.

• ओपी सिंह: चतरा और हजारीबाग क्षेत्र में पदस्थापना के दौरान वन भूमि और अवैध उत्खनन से जुड़े विवादों में नाम.

• संजीव कुमार: वन विकास निगम और अन्य परियोजनाओं में वित्तीय प्रक्रियाओं के उल्लंघन के आरोप.

• आरके सिंह: विभागीय निविदाओं और खरीद में गड़बड़ी के आरोप.

• एनके सिंह: चतरा इलाके में तैनाती के दौरान लकड़ी तस्करों को कथित संरक्षण देने का मामला.

• दिनेश कुमार: विभिन्न जिलों में डीएफओ रहते हुए सरकारी फंड के डायवर्जन के आरोप.

• शशि नंदक्योलियार: कुछ परियोजनाओं के क्रियान्वयन में प्रशासनिक शिथिलता और वित्तीय विसंगतियों को लेकर चर्चा में रहे.

• डीके श्रीवास्तव: सेवा के दौरान पद के दुरुपयोग और विभागीय नियमों की अनदेखी के आरोप.

• सिद्धार्थ त्रिपाठी: निर्णयों और आय से जुड़े मामलों में जांच का सामना किया.

• मनीष अरविंद: वित्तीय गड़बड़ी और आय से अधिक संपत्ति के संदेह में एजेंसियों के रडार पर रहे.

• वाईके दास: पुराने टेंडर्स को लेकर विभागीय जांच की आंच पहुंची.

• आरके चौरसिया: वन क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण को बढ़ावा देने और ड्यूटी में लापरवाही के आरोप.

• पीके सेन: पलामू टाइगर रिजर्व और अन्य क्षेत्रों में फंड के प्रबंधन को लेकर सवाल उठे.

• अशोक कुमार: लकड़ी नीलामी और डिपो प्रबंधन में अनियमितता के आरोप.

• एसके गुप्ता: कुछ विशिष्ट योजनाओं के आवंटन में चहेतों को लाभ पहुंचाने के आरोप.

• संजय श्रीवास्तव: नियुक्तियों और विभागीय प्रोन्नति के विवादों में नाम उछला.

आरोपों का क्या रहा आधार

कैंपा घोटाला: केंद्र सरकार द्वारा वनरोपण के लिए दिए गए फंड का उपयोग केवल कागजों पर करने का आरोप.

अवैध खनन: सारंडा और कोल्हान जैसे वन क्षेत्रों में खनन माफियाओं को मौन सहमति देना.

आय से अधिक संपत्ति: अधिकारियों के पास अपनी ज्ञात आय से कई गुना अधिक आलीशान बंगले और निवेश का पाया जाना.

 

 

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