रांची: न्यूज वेव झारखंड के ख़बर का एक बार से असर हुआ है.राज्य के अलग-अलग जिले के ट्रेजरी से करोड़ों रुपया की अवैध निकासी के बाद झारखंड पुलिस मुख्यालय ने प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और रोटेशन पॉलिसी को प्रभावी बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है. मुख्यालय ने राज्य के सभी जिलों, इकाइयों और वाहिनियों में तैनात उन प्रधान लिपिकों और अकाउंटेंट की सूची मांगी है, जो पिछले तीन साल या उससे अधिक समय से एक ही स्थान पर पदस्थापित हैं. उल्लेखनीय है कि बीते दस अप्रैल को “सिस्टम में जमे स्थायी बाबू 32 करोड़ का खेल: ट्रांसफर नीति बेअसर, पुलिस महकमे की अंदरूनी सच्चाई उजागर” शीर्षक से खबर प्रकाशित हुआ था, जिसमें प्रमुखता से यह बात को उठाया गया था कि एसपी का कार्यकाल औसतन दो वर्ष, डीएसपी का तीन वर्ष और इंस्पेक्टर का दो से पांच वर्ष तय होता है. लेकिन थानों के मुंशी, पुलिस लाइन के बाबू, और गोपनीय शाखा के कर्मचारी दशकों से एक ही कुर्सी पर जमे है.
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24 घंटे के भीतर मांगी गई रिपोर्ट
डीजीपी कार्यालय की ओर से जारी इस पत्र में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि सभी संबंधित अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों के ऐसे कर्मियों का विवरण 24 घंटे के भीतर अनिवार्य रूप से मुख्यालय को उपलब्ध कराएं. यह पत्र अवर सचिव ललन कुमार दास के हस्ताक्षर से जारी किया गया है. इसमें त्वरित कार्रवाई की मांग की गई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि विभाग जल्द ही बड़े पैमाने पर तबादले या प्रशासनिक फेरबदल की तैयारी में है.
क्या है मुख्य उद्देश्य?
आमतौर पर सरकारी विभागों में एक ही सीट पर लंबे समय तक जमे रहने से कार्यक्षमता प्रभावित होने और कई बार मिलीभगत की शिकायतें आने की संभावना रहती है. पुलिस मुख्यालय के इस कदम को प्रशासनिक सुधार के तौर पर देखा जा रहा है.
मुख्यालय ने इसके लिए एक निर्धारित प्रोफॉर्म भी भेजा है, जिसमें कर्मी का नाम, वर्तमान पदस्थापन की तिथि और अभियुक्ति भरकर देना है.
