रांची: राज्य की बुनियादी संरचना को नई ऊंचाई देने के संकल्प के साथ भवन निर्माण विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपना महत्वाकांक्षी खाका तैयार कर लिया है. इस योजना के तहत न केवल राज्य के भीतर प्रशासनिक और न्यायिक ढांचे को मजबूत किया जाएगा, बल्कि ओडिशा के पुरी जैसे धार्मिक स्थल पर भी झारखंड अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगा.

ओडिशा के पुरी में झारखंड भवन का निर्माण:
झारखंड सरकार अब पड़ोसी राज्य ओडिशा के पुरी में अपना आधिकारिक झारखंड भवन बनाने जा रही है. यह परियोजना श्रद्धालुओं और अधिकारियों दोनों के लिए गेम-चेंजर साबित होगी. जगन्नाथ पुरी जाने वाले झारखंड के लाखों श्रद्धालुओं को अब निजी होटलों पर निर्भर नहीं रहना होगा. उन्हें किफायती दरों पर सुरक्षित और सुविधासंपन्न आवास मिलेगा. दूसरे राज्य में इस भवन के बनने से झारखंड की सांस्कृतिक और राजकीय पहचान सुदृढ़ होगी. साथ ही राज्य के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को आधिकारिक दौरों के दौरान ठहरने की उचित व्यवस्था मिलेगी.
रांची की बदलती तस्वीर, हाई-राइज आवासीय टावर:
राजधानी रांची में सरकारी आवासों की बढ़ती किल्लत को देखते हुए विभाग ने आवासीय टावर मॉडल पर काम करने का निर्णय लिया है. सीमित भूमि की उपलब्धता को देखते हुए बहुमंजिला इमारतों का निर्माण किया जाएगा. इन टावरों में अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी. कार्यस्थल के पास व्यवस्थित आवास मिलने से कर्मचारियों के समय की बचत होगी और प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी.
न्यायिक व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण, 4 जिलों में नए कोर्ट भवन:
आम जनता को सुलभ और त्वरित न्याय दिलाने के उद्देश्य से राज्य के चार प्रमुख जिलों में नए न्यायालय भवनों का निर्माण प्रस्तावित है. जिनमें गिरिडीह, देवघर, गोड्डा और चाईबासा जिला शामिल है. वर्तमान न्यायालयों में बढ़ते मुकदमों के बोझ को कम करना और वकीलों व केस लड़ने वाले के लिए आधुनिक सुविधाएं सुनिश्चित करना.
अनुमंडलीय स्तर पर न्याय की पहुंच:
न्यायिक प्रक्रिया को विकेंद्रीकृत करते हुए सरकार ने अनुमंडल स्तर पर भी बुनियादी ढांचे को विस्तार देने का निर्णय लिया है. बुंडू (रांची) और बगोदर-सरिया (गिरिडीह) इन क्षेत्रों में नए अनुमंडलीय न्यायालय भवनों का निर्माण किया जाएगा. इसके बनने से ग्रामीणों को छोटे-छोटे मामलों के लिए जिला मुख्यालय की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी, जिससे उनके समय और पैसे दोनों की बचत होगी.

