रांची: राज्य गठन से अब तक अंचल कार्यालय भ्रष्टाचार और विवादों के केंद्र रहे हैं. खासकर अंचलाधिकारियों पर गाज गिरने का सिलसिला कभी थमा नहीं है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 250 से अधिक अंचलाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगे हैं. इनमें से कई जेल गए, कई निलंबित हुए और कुछ को सेवा से बर्खास्त तक किया गया है.
150 से अधिक अंचलाधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, प्रवर्तन निदेशालय या विभागीय स्तर पर जांच चली है. 15 सीओ को अब तक सेवा से बर्खास्त किया गया है या सेवा के लायक न मानकर अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई है.
रजिस्टर टू में छेड़छाड़ रहा है प्रमुख कारण
झारखंड में अंचल अधिकारियों पर कार्रवाई का मुख्य कारण रजिस्टर-II (हल्का पंजी) में छेड़छाड़ करना रहा है. हाल के वर्षों में डिजिटल म्यूटेशन आने के बावजूद, बैकडेट एंट्री और बिचौलियों के माध्यम से होने वाला भ्रष्टाचार प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है. सरकार ने अब सख्त कदम उठाते हुए दागी अधिकारियों को ‘नॉन-पोस्टिंग’ (वेटिंग फॉर पोस्टिंग) में रखने या उन्हें फील्ड से हटाने की नीति अपनाई है. लगभग 10 से अधिक सीओ को उनकी खराब सर्विस रिकॉर्ड और भ्रष्टाचार के कारण जबरन रिटायर किया गया है.
Also Read: प्रिंस खान के गुर्गे राहुल राणा ने मांगी अग्रिम बेल, कोर्ट ने मांगी केस डायरी
जमीन की लूट और 20 दागदार चेहरे
• भानु प्रताप प्रसाद (बड़गाईं, रांची): जमीन घोटाले के सबसे चर्चित चेहरों में से एक. ईडी की जांच में इनके पास से भारी मात्रा में सरकारी दस्तावेज और जमीन के अवैध रिकॉर्ड मिले. इन्हें जेल भेजा गया और सेवा से बर्खास्तगी की प्रक्रिया शुरू हुई.
• अरविंद कुमार (नगड़ी, रांची): जमीन म्यूटेशन में गड़बड़ी और भू-माफियाओं को लाभ पहुंचाने के आरोप में एसीबी और विभागीय कार्रवाई का सामना कर चुके हैं.
• निलय सिंह (नामकुम, रांची): आय से अधिक संपत्ति और जमीन के अवैध हस्तांतरण के गंभीर आरोप. एसीबी ने इनके ठिकानों पर छापेमारी भी की थी.
• मनोज कुमार (हेहल, रांची): हेहल अंचल में पदस्थापना के दौरान सरकारी जमीन के कागजात में हेरफेर और म्यूटेशन के बदले रिश्वत लेने के आरोप में कार्रवाई के घेरे में रहे.
• दिनेश महतो: पद का दुरुपयोग कर गैर-मजरुआ जमीन को निजी व्यक्तियों के नाम करने के आरोप में विभागीय जांच और निलंबन की कार्रवाई का सामना किया.
• प्रदीप कुमार: चतरा और अन्य जिलों में पदस्थापना के दौरान मनरेगा और जमीन से जुड़े वित्तीय घोटालों में नाम आया.
• संजय कुमार (हजारीबाग): आय से अधिक संपत्ति के मामले में एसीबी की रडार पर रहे.
• रविंद्र सिंह (देवघर): देवघर के चर्चित जमीन घोटाले में कई अंचलाधिकारियों का नाम आया था, जिनमें इनकी भूमिका संदेहास्पद पाई गई.
• ललित कुमार (धनबाद): कोयला क्षेत्र में जमीन के दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ और माफियाओं को संरक्षण देने के आरोप.
• सुनील कुमार (पलामू): म्यूटेशन के बदले खुलेआम रिश्वत मांगने के वीडियो वायरल होने के बाद निलंबित किए गए.
• राजेश सिंह (साहिबगंज): अवैध खनन और जमीन के पट्टों के आवंटन में गड़बड़ी के आरोप.
• विकास कुमार (जमशेदपुर): औद्योगिक भूमि के गलत इस्तेमाल और एनओसी देने के बदले भ्रष्टाचार के आरोप.
• सत्येंद्र कुमार (लोहरदगा): सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और भूमि आवंटन में वित्तीय अनियमितता.
• अमित कुमार (कोडरमा): पत्थर खदानों की जमीन के सीमांकन में गड़बड़ी और रिश्वतखोरी.
• उमेश कुमार (गढ़वा): ग्रामीणों की जमीन हड़पने में भू-माफियाओं की मदद करने के गंभीर आरोप.
• विशाल कुमार (बोकारो): विस्थापितों की जमीन के बदले मुआवजे के खेल में भ्रष्टाचार के आरोप.
• राम निवास (दुमका): सरकारी रजिस्टर-II में छेड़छाड़ कर जमीन की प्रकृति बदलने के आरोप.
• अजय कुमार (सिमडेगा): विभागीय जांच में कार्य के प्रति लापरवाही और भ्रष्टाचार की पुष्टि के बाद बर्खास्तगी की अनुशंसा.
• संदीप कुमार (खूंटी): अफीम की खेती वाली जमीन के रिकॉर्ड में हेरफेर और प्रशासन को गुमराह करने के आरोप.
