NewsWave Expose: मरीजों की जान से खिलवाड़, फाइलों में भरा भंडार, राज्य के अस्पतालों में 200 करोड़ की दवाओं का घोटाला, विभाग चुप्प

Ranchi: झारखंड के सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने आने वाले गरीब मरीजों के हिस्से की दवाएं कागजों पर तो बांटी जा रही...

Ranchi: झारखंड के सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने आने वाले गरीब मरीजों के हिस्से की दवाएं कागजों पर तो बांटी जा रही हैं, लेकिन हकीकत में वे स्टोर से गायब हैं. पिछले दो वर्षों (2024 से 2026) के दौरान राज्य के स्वास्थ्य विभाग में दवाओं की खरीद और वितरण में भारी अनियमितताएं सामने आई हैं. ताजा आंकड़ों और ऑडिट रिपोर्टों के अनुसार, राज्य के विभिन्न जिलों में करोड़ों रुपये की दवाओं की हेराफेरी हुई है.

कहीं एक्सपायरी दवाओं का जखीरा मिल रहा है, तो कहीं बाजार से तीन गुना अधिक कीमत पर दवाएं खरीदी जा रही हैं. स्वास्थ्य विभाग ने अब सिविल सर्जनों को उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा करने का अल्टीमेटम तो दिया है, लेकिन गायब हुई दवाओं और बर्बाद हुए करोड़ों रुपये की वसूली कैसे होगी, इस पर चुप्पी बरकरार है.

स्वास्थ्य विभाग की 3 बड़ी सर्जिकल गलतियां

  • रेट में भारी अंतर

रांची और जमशेदपुर के बीच दवाओं की खरीद कीमतों में जमीन-आसमान का अंतर पाया गया है. एक ही कंपनी से खरीदी गई एल्बेंडाजोल की 100 टैबलेट रांची में 151.47 रुपये में ली गई, जबकि जमशेदपुर में वही दवा 84.50 रुपये में खरीदी गई.

  • फंड का कम उपयोग

फरवरी 2026 की समीक्षा बैठक में यह सामने आया कि स्वास्थ्य विभाग 15वें वित्त आयोग के फंड का सही इस्तेमाल नहीं कर पाया है. कई जिलों में एक भी राशि का खर्च दर्ज नहीं किया गया, जिससे जरूरी दवाएं और उपकरण अस्पतालों तक नहीं पहुंच सके.

  • स्टॉक रजिस्टर में फर्जीवाड़ा

कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को दवाएं नहीं मिलीं, जबकि रिकॉर्ड में उन्हें वितरित दिखाया गया. कुछ मामलों में स्टॉक में 10 प्रतिशत से 83 प्रतिशत तक दवाओं की कमी पाई गई है.

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टेंडर में देरी, लोकल खरीद में खेल

स्वास्थ्य विभाग की सबसे बड़ी खामी टेंडर प्रक्रिया में देरी रही है. विभाग समय पर टेंडर फाइनल नहीं करता, जिससे अस्पतालों को आपातकालीन स्थिति का हवाला देकर स्थानीय स्तर पर ऊंचे दामों पर दवाएं खरीदने की छूट मिल जाती है. विधायक सरयू राय ने पूर्व में भी स्वास्थ्य विभाग पर 150 करोड़ रुपये के दवा घोटाले का आरोप लगाया था, जिसमें 103 प्रकार की दवाइयां सरकारी कंपनियों से ऊंचे दामों पर खरीदी गई थीं.

कहां-कहां कितना घोटाला: फैक्ट फाइल

  • रांची

ऊंची दरों पर खरीद (एल्बेंडाजोल व अन्य एंटीबायोटिक्स)

वित्तीय अनियमितता: 50 से 70 करोड़ रुपये

  • जमशेदपुर

स्टॉक रजिस्टर में हेरफेर और बाजार दर से अधिक भुगतान

वित्तीय अनियमितता: 30 करोड़ रुपये

  • धनबाद

एक्सपायरी दवाओं का समय पर निस्तारण न होना और नया ऑर्डर

वित्तीय अनियमितता: 15 करोड़ रुपये

  • बोकारो

वेतन और दवा मद की राशि में संदिग्ध निकासी

वित्तीय अनियमितता: 12 करोड़ रुपये

  • पलामू, गढ़वा और चतरा

दवाओं की अनुपलब्धता और फंड लैप्स

वित्तीय अनियमितता: 40 करोड़ रुपये

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