Lifestyle Desk: दक्षिण भारतीय खानपान की अपनी एक अलग ही पहचान है, और इसी समृद्ध परंपरा का अहम हिस्सा है ‘अवियल’-एक ऐसी डिश जो सादगी में भी स्वाद का कमाल दिखाती है. केरल और तमिलनाडु की रसोई से निकली यह खास तैयारी कई तरह की सब्जियों को मिलाकर बनाई जाती है, जिसकी गाढ़ी बनावट और अनोखा स्वाद इसे अलग पहचान देते हैं. खाने के शौकीनों के लिए यह सिर्फ एक डिश नहीं, बल्कि एक अनुभव है-और इसके पीछे छिपी कहानी इसे और भी दिलचस्प बना देती है.
नाम में ही छिपा है इसका असली मतलब
‘अवियल’ नाम अपने आप में इसकी पहचान बयां करता है. इस शब्द का अर्थ ही है-कई चीजों का ऐसा संगम, जो मिलकर एक अनोखा स्वाद रच दे. यही वजह है कि यह डिश अलग-अलग सब्जियों के मेल से तैयार की जाती है और अपनी विविधता के कारण खास मानी जाती है.

इसे बनाने में आमतौर पर कई तरह की ताजी सब्जियों का उपयोग किया जाता है. कच्चा केला, जिमीकंद, लौकी, गाजर, बीन्स, बैंगन, सहजन और परवल जैसी पौष्टिक सामग्री इसमें शामिल होती हैं, जो इसे न सिर्फ स्वादिष्ट बल्कि हेल्दी भी बनाती हैं.
इस व्यंजन की खासियत सिर्फ सब्जियों तक सीमित नहीं है. कद्दूकस किया हुआ नारियल और ताजे कढ़ी पत्ते इसका स्वाद और बढ़ाते हैं, जबकि अंत में डाला गया नारियल तेल इसकी खुशबू को एक अलग ही स्तर पर पहुंचा देता है. यही संतुलन ‘अवियल’ को साधारण सब्जी से कहीं ज्यादा खास बना देता है.
हर इलाके में अलग है ‘अवियल’ का अंदाज
दक्षिण भारत में ‘अवियल’ सिर्फ एक डिश नहीं, बल्कि रोजमर्रा के खाने का अहम हिस्सा है. अलग-अलग राज्यों में इसे अपने-अपने तरीके से बनाया और परोसा जाता है, जो इसकी खासियत को और बढ़ा देता है. केरल में इसे मुख्य भोजन के तौर पर शामिल करना आम बात है, वहीं तमिलनाडु में यह खासकर दोपहर के खाने की थाली में जगह बनाता है. हर क्षेत्र अपने स्वाद और परंपरा के अनुसार इसमें छोटे-छोटे बदलाव करता है.

उदाहरण के तौर पर, कोझिकोड के लोग अपने अवियल में हल्का कड़वापन लाने के लिए करेला भी शामिल करते हैं. वहीं कोल्लम इलाके में इसे बनाते समय टमाटर का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे इसके स्वाद में हल्की खटास आ जाती है. यही विविधता ‘अवियल’ को हर जगह एक नया और दिलचस्प रूप देती है.
भीम से जुड़ी है ‘अवियल’ की दिलचस्प कहानी
इस स्वादिष्ट डिश के साथ एक रोचक पौराणिक मान्यता भी जुड़ी हुई है, जो इसे और खास बना देती है. माना जाता है कि ‘अवियल’ का संबंध महाभारत काल से है और इसकी शुरुआत एक अनोखी परिस्थिति में हुई थी. कथाओं के अनुसार, वनवास के दौरान जब पांडव जंगल में रह रहे थे, तब भोजन की व्यवस्था करना आसान नहीं था. ऐसे में महाबली भीम ने जो भी सब्जियां उपलब्ध थीं, उन्हें एक साथ मिलाकर एक नया व्यंजन तैयार किया.
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कहा जाता है कि अलग-अलग सब्जियों के इस मेल से बनी यह डिश स्वाद में इतनी बेहतरीन थी कि धीरे-धीरे यह लोगों के बीच लोकप्रिय हो गई. समय के साथ यही अनोखा पकवान ‘अवियल’ के नाम से जाना जाने लगा और आज दक्षिण भारतीय थाली का अहम हिस्सा बन चुका है.
