Hazaribagh: हजारीबाग और गिरिडीह सहित धनबाद के सैकड़ों गांवों की जीवन रेखा मानी जाने वाली उत्तरवाहिनी जमुनिया नदी आज बदहाली की चरम स्थिति में पहुंच गई है. कभी स्वच्छ, अविरल और जीवनदायिनी रही यह नदी अब गंदगी, मलबे और उपेक्षा के बोझ तले सिमटती जा रही है. अब हालात ऐसे हैं कि जहां कभी कमर तक पानी बहता था, वहां आज घुटनों भर पानी भी मुश्किल से नजर आता है.
उद्गम से संगम तक की यात्रा
भेलवारा जंगल के पत्थलचुआ से उद्गमित यह नदी लगभग 150 किलोमीटर की लंबी यात्रा तय कर बोकारो जिला के तेलमचो में दामोदर नदी से जाकर मिलती है। अपने प्रवाह के दौरान यह विष्णुगढ़, बगोदर, डुमरी, तोपचांची और बाघमारा जैसे कई इलाकों की जीवनधारा बनी रही है.
कृषि और जीवन का आधार
कृषि, सिंचाई और मत्स्य पालन के लिए यह नदी वर्षों से स्थानीय लोगों का प्रमुख सहारा रही है. विष्णुगढ़ में “उत्तरवाहिनी” के रूप में विख्यात यह नदी केवल जलस्रोत नहीं है, बल्कि गहरी आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है. विष्णुगढ़ वासी इसे गंगा के समान पवित्र मानते हैं.
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धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
नदी के तट पर स्थित ऐतिहासिक शिव-पार्वती मंदिर, नव निर्मित भव्य सूर्य मंदिर और समीप स्थित हनुमान धारा मंदिर इसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाते हैं. कार्तिक और चैत्र महीने में आयोजित छठ पूजा के दौरान यहां आस्था का जनसैलाब उमड़ता है. चैती दुर्गा पूजा के महासप्तमी के दिन भव्य गंगा आरती का आयोजन होता है. वहीं कार्तिक और श्रावण महीने में प्रतिदिन श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है.
उपेक्षा और अतिक्रमण से संकट
इसके बावजूद विडंबना यह है कि इतनी धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता के बावजूद इस नदी की सुध लेने वाला कोई नहीं दिख रहा है. नदी में बढ़ता मलबा, गंदगी का अंबार और नियमित सफाई के अभाव में इसकी धारा अवरुद्ध हो गई है. जलस्तर में लगातार गिरावट आ रही है, जिससे नदी सूखने के कगार पर पहुंच गई है.
भविष्य के लिए खतरे की घंटी
यह स्थिति न केवल पर्यावरणीय संकट का संकेत है, बल्कि आने वाले समय में जल संकट और कृषि पर भी गंभीर असर डाल सकती है. स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन एवं संबंधित विभाग इस दिशा में पूरी तरह से उदासीन बने हुए हैं.
संरक्षण की उठी मांग
ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और आमजनों ने जमुनिया नदी के संरक्षण के लिए ठोस और सामूहिक पहल करने की अपील की है. उनका कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह ऐतिहासिक धरोहर समाप्त हो सकती है. वहीं लोगों का यह भी मानना है कि यदि अभी से प्रयास शुरू किए जाएं तो उत्तरवाहिनी जमुनिया नदी को फिर से उसके पुराने स्वरूप में लौटाया जा सकता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है.
