हजारीबाग में निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ भड़के अभिभावक, पुतला दहन, जताया आक्रोश

Hazaribagh : हजारीबाग में निजी स्कूलों की बढ़ती मनमानी के खिलाफ आज एक जोरदार विरोध प्रदर्शन देखने को मिला. समाजसेवी अभिषेक कुमार...

Hazaribagh : हजारीबाग में निजी स्कूलों की बढ़ती मनमानी के खिलाफ आज एक जोरदार विरोध प्रदर्शन देखने को मिला. समाजसेवी अभिषेक कुमार के नेतृत्व में बड़ी संख्या में अभिभावकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त अनियमितताओं के खिलाफ आवाज बुलंद की. इस दौरान शिक्षा अधिकारी और निजी स्कूल प्रबंधन का पुतला दहन कर अपना विरोध दर्ज कराया गया.

निजी स्कूल कर रहे री-एडमिशन के नाम पर धांधली

कार्यक्रम में शामिल लोगों ने स्पष्ट रूप से कहा कि निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों पर लगातार आर्थिक बोझ डाला जा रहा है, जो पूरी तरह से अनुचित और अस्वीकार्य है. खासकर री-एडमिशन के नाम पर की जा रही अवैध वसूली ने अभिभावकों को परेशान कर दिया है. हर वर्ष नए सत्र के शुरू होते ही अभिभावकों को भारी-भरकम फीस और अन्य अनावश्यक शुल्क देने के लिए मजबूर किया जाता है, जिससे मध्यम और निम्नवर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है.

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किताब, कापी और ड्रेस की खरीददारी चिन्हित दुकानों से करने का दबाव

अभिभावकों ने यह भी आरोप लगाया कि कई निजी स्कूल जबरन किताब-कॉपी, ड्रेस, जूते और अन्य शैक्षणिक सामग्री एक ही निर्धारित दुकान से खरीदने का दबाव बनाते हैं. इससे न केवल अभिभावकों की पसंद की स्वतंत्रता छिनती है, बल्कि उन्हें महंगे दामों पर सामान खरीदने के लिए बाध्य होना पड़ता है. इस तरह की व्यवस्था पूरी तरह से गलत है और इसे तुरंत बंद किया जाना चाहिए.

निजी स्कूलों की मनमानी पर लगे रोक : अभिषेक कुमार

समाजसेवी अभिषेक कुमार (क्रांतिकारी) ने इस मौके पर कहा कि शिक्षा एक मौलिक अधिकार है, लेकिन निजी स्कूल इसे व्यवसाय बना चुके हैं. उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इस मनमानी पर रोक नहीं लगाई गई तो आने वाले दिनों में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा. अभिषेक कुमार ने प्रशासन के समक्ष कई प्रमुख मांगें रखीं. उन्होंने कहा कि सबसे पहले री-एडमिशन के नाम पर की जा रही अवैध वसूली पर तत्काल रोक लगाई जाए. इसके अलावा अभिभावकों को किसी एक दुकान से किताब-कॉपी या ड्रेस खरीदने के लिए मजबूर करना बंद किया जाए. साथ ही स्कूल फीस में हो रही लगातार वृद्धि पर नियंत्रण के लिए सख्त नियम बनाए जाएं, ताकि शिक्षा सभी वर्गों के लिए सुलभ रह सके.

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प्रशासन से दोषी स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग

कार्यक्रम में मौजूद अभिभावकों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि निजी स्कूलों की मनमानी अब बर्दाश्त के बाहर हो चुकी है. उन्होंने प्रशासन से मांग की कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए. अभिभावकों ने एकजुट होकर यह संकल्प भी लिया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक वे इस आंदोलन को जारी रखेंगे. इस विरोध प्रदर्शन ने यह साफ कर दिया है कि अब अभिभावक अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो चुके हैं और किसी भी प्रकार के शोषण को सहन करने के लिए तैयार नहीं हैं. यह आंदोलन न केवल वर्तमान समस्याओं के समाधान की दिशा में एक कदम है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के बेहतर भविष्य की लड़ाई भी है.

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