धर्म डेस्क: वैशाख का महीना शुरू होते ही वातावरण में एक खास धार्मिक उत्साह महसूस होने लगता है. इसी माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर परशुराम जयंती मनाई जाती है, जिसे बेहद पवित्र माना जाता है. मान्यता है कि इसी शुभ दिन भगवान परशुराम का अवतरण हुआ था. खास बात यह है कि यही तिथि अक्षय तृतीया के रूप में भी जानी जाती है, जिसे सनातन परंपरा में अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है—यही कारण है कि इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है.
क्या बनाता है भगवान परशुराम के अवतार को इतना खास?
अक्सर लोग भगवान परशुराम को केवल उनके तेज और क्रोध से जोड़कर देखते हैं, लेकिन उनका व्यक्तित्व इससे कहीं अधिक व्यापक और संतुलित है. वे ज्ञान और शक्ति के अद्भुत संगम का प्रतीक माने जाते हैं.
उनके एक हाथ में ‘धनुष’ होता है, जो ज्ञान, नीति और शास्त्र का संकेत देता है, वहीं दूसरे हाथ में ‘परशु’ यानी फरसा होता है, जो शक्ति, साहस और अन्याय के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक है. यही संतुलन उनके अवतार को विशेष बनाता है.
परशुराम जी का संदेश साफ है—सिर्फ ज्ञान होना पर्याप्त नहीं, बल्कि उस ज्ञान और सत्य की रक्षा के लिए शक्ति का होना भी उतना ही आवश्यक है. वे यह सिखाते हैं कि जब समाज में अधर्म बढ़े, तो धर्म की रक्षा के लिए दृढ़ता और साहस के साथ खड़ा होना चाहिए.
रोचक मान्यता यह भी है कि भगवान परशुराम को ‘चिरंजीवी’ माना गया है. यानी कहा जाता है कि वे अमर हैं और आज भी पृथ्वी पर मौजूद हैं, तथा कलयुग के अंत तक उनका अस्तित्व बना रहेगा.
पूजा तिथि और मुहूर्त (2026)
साल 2026 में परशुराम जयंती के लिए तिथि कुछ इस तरह है:
- तृतीया तिथि प्रारंभ: 19 अप्रैल, रविवार, सुबह 10:49 बजे से
- मुख्य पूजा का दिन: 19 अप्रैल 2026, रविवार
धार्मिक परंपरा के अनुसार, सूर्योदय के समय पड़ने वाली तृतीया तिथि को ही मुख्य पर्व माना जाता है. इस दिन सुबह के शुभ समय में पूजा और दान करना सबसे लाभकारी होता है.
परशुराम जयंती 2026: आसान तरीके से करें पूजा और व्रत का विशेष आयोजन
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें.
- पूजा स्थल को साफ करके भगवान परशुराम की प्रतिमा या चित्र रखें.
- प्रतिमा पर चंदन और अक्षत चढ़ाएं.
- फूल, तुलसी और पीले फूलों की माला भक्ति भाव से अर्पित करें.
- धूप और दीपक जलाकर वातावरण को पवित्र बनाएं.
- ऋतु फल और मिठाइयों का भोग लगाएं।
- भगवान विष्णु के मंत्रों और परशुराम स्तुति का पाठ करें.
- श्रद्धा से आरती उतारें और सभी को प्रसाद बांटें.
- इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को दान अवश्य दें.
नोट: अक्षय तृतीया पर किया गया दान हमेशा फलदायी माना जाता है.
शास्त्रों की बातें: परशुराम के जन्म और चिरंजीवी होने की कथा
भगवान परशुराम का जन्म ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के घर हुआ था, ऐसा ‘श्रीमद्भागवत पुराण’ और ‘ब्रह्मांड पुराण’ में वर्णित है. इन ग्रंथों में उनके जीवन और अद्भुत शक्तियों का विस्तृत विवरण मिलता है.
साथ ही, ‘महाभारत’ और ‘भविष्य पुराण’ में उन्हें चिरंजीवी बताया गया है और कल्कि अवतार के मार्गदर्शक के रूप में उनका उल्लेख भी मिलता है.
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