पुलिसकर्मी की मौत के बाद भारी बवाल,अधिकारियों पर प्रताड़ना का आरोप, छुट्टी न मिलने से बिगड़ी थी तबीयत

जमशेदपुर: जिले के जादूगोड़ा स्थित कांस्टेबल ट्रेनिंग सेंटर (सीटीसी) में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब संदिग्ध परिस्थितियों में एक प्रशिक्षु जवान...

जमशेदपुर: जिले के जादूगोड़ा स्थित कांस्टेबल ट्रेनिंग सेंटर (सीटीसी) में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब संदिग्ध परिस्थितियों में एक प्रशिक्षु जवान की मौत हो गई. इस घटना के बाद ट्रेनिंग सेंटर के अन्य जवानों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. मंगलवार की देर रात तक परिसर में स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण बनी हुई थी. मृतक जवान की पहचान बजरंगी यादव के रूप में हुई है, जो रांची जिला बल में कांस्टेबल (पुलिस नंबर 3016, चेस्ट नंबर बी-126) के पद पर तैनात थे और यहां प्रशिक्षण ले रहे थे.

जानकारी के अनुसार, बजरंगी यादव पिछले करीब एक सप्ताह से बीमार चल रहे थे. मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे जब उनकी स्थिति नाजुक हो गई, तब उन्हें आनन-फानन में यूसीआईएल (UCIL) अस्पताल ले जाया गया. दुर्भाग्यवश, शाम करीब 4 बजे इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.

 जवानों का आक्रोश और अधिकारियों पर गंभीर आरोप:

जवान की मौत की खबर फैलते ही ट्रेनिंग सेंटर में जवानों का गुस्सा भड़क उठा. साथी जवानों ने प्रशिक्षण केंद्र के अधिकारियों पर संवेदनहीनता और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं. जवानों का दावा है कि बजरंगी यादव ने बीमार होने के कारण कई बार छुट्टी की गुहार लगाई थी, लेकिन अधिकारियों ने उसे अनसुना कर दिया. जवानों का आरोप है कि घर में किसी आपात स्थिति या गंभीर बीमारी की स्थिति में भी छुट्टी नहीं दी जाती, यदि कोई छुट्टी मांगता है, तो उसे सस्पेंड करने की धमकी दी जाती है. प्रशिक्षुओं ने सीधे तौर पर कई अधिकारियों पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है. जवानों का कहना है कि उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है.

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 पासिंग आउट में देरी:

एक प्रमुख शिकायत यह भी है कि सितंबर माह में ही परीक्षाएं संपन्न हो चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद अब तक पासिंग आउट परेड नहीं कराई गई है. इस अनिश्चितता के कारण प्रशिक्षु जवान लंबे समय से मानसिक तनाव में हैं

जवान की मौत के बाद ट्रेनिंग सेंटर के भीतर जवानों ने नारेबाजी की और व्यवस्था के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया.जवानों का कहना है कि अगर समय पर बजरंगी को बेहतर इलाज या छुट्टी मिल जाती, तो शायद उनकी जान बच सकती थी.

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