Ranchi: झारखंड राज्य बिजली वितरण निगम में कैडर मैनेजमेंट और प्रशासनिक नैतिकता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. एक ओर जहां सैकड़ों इंजीनियर अपनी जायज प्रोन्नति के लिए फाइलों के चक्कर काट रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रबंधन के चहेते इंजीनियरों के लिए नियमों को दरकिनार कर रांची के प्राइम डिविजनों में पद सुरक्षित रखे गए हैं. स्थिति यह है कि पद सृजित होने के बावजूद काबिलियत के बजाय रसूख हावी नजर आ रहा है.
पद सृजन, लेकिन प्रोन्नति ठप
पिछले वर्ष 25 जनवरी को 129 नए पदों का सृजन किया गया था. हालांकि एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी इन पदों पर प्रोन्नति की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है. इंजीनियरों का आरोप है कि पदों का सृजन कार्यक्षमता बढ़ाने के बजाय केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित रह गया है.
विभिन्न श्रेणियों में पदों का ब्योरा
निगम में सृजित पदों में कार्यकारी निदेशक के 06 पद, महाप्रबंधक तकनीकी के 27 पद, महाप्रबंधक CGRF के 11 पद, उप महाप्रबंधक तकनीकी के 59 पद, उप महाप्रबंधक CGRF के 19 पद और उप महाप्रबंधक HR के 07 पद शामिल हैं.
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रांची में जमे इंजीनियरों पर सवाल
निगम की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि तबादला नीति का पालन केवल सामान्य कर्मचारियों के लिए होता है. दर्जन भर से अधिक इंजीनियर पिछले 15 वर्षों से रांची में ही पदस्थापित हैं. वे कभी मेन रोड डिवीजन तो कभी अपर बाजार डिवीजन में पदस्थ रहकर लगातार राजधानी में ही जमे हुए हैं. वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में इंजीनियरों की भारी कमी बनी हुई है.
तकनीकी पदों पर प्रशासनिक तैनाती
कैडर मैनेजमेंट की स्थिति तब और स्पष्ट हो जाती है जब नियमों को नजरअंदाज करते हुए एक कार्यपालक अभियंता को उप महाप्रबंधक HR जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद पर तैनात कर दिया गया. तकनीकी अधिकारियों को प्रशासनिक जिम्मेदारियां देना और सृजित पदों को खाली रखना एचआर नीति पर सवाल खड़ा करता है.
असंतोष और कार्यप्रणाली पर असर
प्रबंधन के इस रवैये से निगम के अधिकारियों और इंजीनियरों के बीच असंतोष बढ़ता जा रहा है. रसूखदारों को प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति ने कार्य संस्कृति को प्रभावित किया है. यदि समय रहते प्रोन्नति प्रक्रिया पूरी नहीं की गई और लंबे समय से रांची में जमे अधिकारियों का स्थानांतरण नहीं हुआ, तो इसका सीधा असर राज्य की बिजली व्यवस्था पर पड़ सकता है.
