एमएस धोनी और कई नेताओं की बढ़ सकती है मुश्किलें, हाउसिंग कॉलोनियों में व्यावसायिक गतिविधियों पर निगम का हंटर, रद्द होंगे ट्रेड लाइसेंस

रांची: झारखंड की राजधानी रांची समेत कई जिलों की हाउसिंग कॉलोनियों में दशकों से चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर अब बंदी की...

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रांची: झारखंड की राजधानी रांची समेत कई जिलों की हाउसिंग कॉलोनियों में दशकों से चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर अब बंदी की तलवार लटक गई है. सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद रांची नगर निगम (RMC) ने आवासीय क्षेत्रों में चल रही दुकानों, दफ्तरों और क्लीनिकों के खिलाफ बड़े अभियान की शुरुआत कर दी है. इस कार्रवाई की जद में भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का आवास भी आ सकता है.

8 टीमों का गठन, सर्वे हुआ शुरू

रांची नगर निगम के प्रशासक के निर्देशानुसार, आवासीय कॉलोनियों में चल रहे अवैध व्यवसायों को चिह्नित करने के लिए आठ विशेष टीमों का गठन किया गया है. ये टीमें मुख्य रूप से हरमू, अरगोड़ा और बारियातू हाउसिंग कॉलोनी के आठ प्रमुख मार्गों पर सर्वे करेंगी. इसका उद्देश्य यह है, कि घरों में चल रहे क्लीनिक, ऑफिस, शोरूम और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों की पहचान करना. सर्वे के बाद इन सभी प्रतिष्ठानों के ट्रेड लाइसेंस रद्द कर दिए जाएंगे. आवासीय इलाकों के लिए अब कोई नया ट्रेड लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा.

धोनी और दिग्गज नेताओं पर भी पड़ेगा असर

इस कार्रवाई ने न केवल आम व्यापारियों, बल्कि शहर के रसूखदार लोगों की भी चिंता बढ़ा दी है. हरमू आवासीय कॉलोनी में महेंद्र सिंह धोनी को राज्य सरकार द्वारा जमीन आवंटित की गई थी. वर्तमान में इस स्थान पर एक निजी कंपनी का पैथोलॉजी लैब संचालित हो रहा है. नियमों की सख्ती के कारण इस लैब का ट्रेड लाइसेंस भी रद्द होना तय माना जा रहा है. धोनी के अलावा कई बड़े राजनेताओं और रसूखदारों के भवनों में भी व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं, जिन्हें बंद करने का नोटिस जारी किया जा सकता है.

क्या है पूरा मामला?

यह पूरी कवायद सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद शुरू हुई है, जिसमें आवासीय क्षेत्रों के मूल स्वरूप को बनाए रखने पर जोर दिया गया है. रांची के अलावा हजारीबाग, मेदनीनगर, धनबाद और बोकारो में भी हाउसिंग बोर्ड की जमीनों पर हजारों की संख्या में कमर्शियल काम हो रहे हैं.

आम जनजीवन पर प्रभाव

नगर निगम की इस सख्ती से हरमू और बारियातू जैसे इलाकों में रहने वाले सैकड़ों छोटे-बड़े व्यवसाई प्रभावित होंगे. जहां एक तरफ निगम इसे कॉलोनियों की शांति और सुव्यवस्था के लिए जरूरी बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ व्यापारियों में अपने रोजगार को लेकर डर का माहौल है.

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