रांचीः झारखंड का प्रोजेक्ट भवन और नेपाल हाउस सचिवालय परिसर न केवल सत्ता के केंद्र हैं, बल्कि वर्तमान में सरकारी कबाड़खाने की तस्वीर भी पेश कर रहे हैं. लंबे समय से अनुपयोगी खड़े दर्जनों वाहन अब कबाड़ में तब्दील हो चुके हैं, जो सरकारी संसाधनों की बर्बादी और उपेक्षा की कहानी कह रहे हैं. यहां मुख्यमंत्री से लेकर आला अधिकारियों की सवारी रहे सफेद एंबेसडर, जिप्सी और बोलेरो अब जंग की चादर ओढ़े अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं. आलम यह है कि जहां एक तरफ नई गाड़ियों की खरीद के लिए करोड़ों का बजट पास होता है, वहीं दूसरी तरफ ये कंडम घोषित वाहन नीलामी की फाइलों के बीच दम तोड़ रहे हैं.
48 वाहन घोषित किए गए हैं कंडम
लगभग 48 वाहन कंडम घोषित किए गए हैं. इनमें सबसे अधिक संख्या एंबेसडर कार और टाटा सफारी की है, जो पूर्व में मंत्रियों और सचिवों के काफिले का हिस्सा थीं. ताजा आंकड़ों के अनुसार प्रोजेक्ट भवन में लगभग 45 वाहन जिसमें एंबेसडर, सूमो, टाटा सफारी, बोलेरो शामिल हैं. वहीं नेपाल हाउस में लगभग 30 वाहन,जिसमें जिप्सी, बोलेरो, मारुति 800 कंडम घोषित किए जा चुके हैं.
Read Also: रांची : हाइकोर्ट के पास कार और ऑटो में टक्कर के बाद लगी आग, दोनों वाहन जलकर राख
क्या है कंडम वाहनों की वर्तमान स्थिति
अधिकांश वाहन टायर फटने, इंजन सीज होने और बॉडी में जंग लगने के कारण चलने की स्थिति में नहीं हैं और केवल कबाड़ के रूप में खड़े हैं.
क्या है वजह
- 15 साल का नियम: इनमें से अधिकांश वाहन अपनी 15 साल की अनिवार्य सेवा अवधि पूरी कर चुके हैं.
- स्क्रैप पॉलिसी का असर: झारखंड सरकार की नई स्क्रैप पॉलिसी के तहत अब इन्हें सड़क पर चलाने की अनुमति नहीं है, जिसके कारण इनका ग्राफ तेजी से बढ़ा है.
- पार्किंग की समस्या: इन खराब वाहनों ने सचिवालय परिसर की कीमती पार्किंग जगह घेर रखी है, जिससे कार्यरत अधिकारियों और आगंतुकों को परेशानी होती है.
Read Also: राष्ट्रीय खेल घोटाले के आरोपी मधुकांत पाठक को राहत, कोर्ट ने पासपोर्ट रिलीज करने की दी अनुमति
क्यों नहीं हो रही नीलामी
- वैल्यूएशन में देरी: एमवीआई द्वारा वाहनों की बेस प्राइस तय करने में महीनों लग जाते हैं.
- कागजी कार्यवाही: कई वाहनों के इंश्योरेंस और टैक्स अपडेट न होने के कारण नीलामी प्रक्रिया फाइल में ही अटकी रहती है.
- फंड का अभाव: कंडोम घोषित होने के बाद इन वाहनों के रखरखाव पर खर्च बंद हो जाता है, जिससे इनकी स्थिति और खराब हो जाती है और नीलामी में सही दाम नहीं मिल पाता.
Read Also: छऊ नृत्य और संगीत का संगम, सरायकेला महोत्सव में गूंजेगा सोना महापात्र का जादू
सरकार का क्या है निर्देश
सरकार ने हाल ही में राज्य के सभी विभागों को निर्देश दिया है कि 15 साल पुराने वाहनों की सूची तैयार कर उन्हें जल्द से जल्द नीलामी या स्क्रैप के लिए भेजा जाए ताकि नए इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए जगह बनाई जा सके.
