Pakur: विधानसभा क्षेत्र की विधायक निशात आलम द्वारा शिलान्यास किया गया मनीरामपुर का स्वास्थ्य उपकेंद्र अब निर्माण गुणवत्ता को लेकर विवादों में घिर गया है. करीब 55.46 लाख रुपये की लागत से बन रहे इस भवन में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने जांच की मांग की है.
दलदली जमीन पर निर्माण का आरोप
ग्रामीणों के अनुसार, यह स्वास्थ्य केंद्र दलदली जमीन पर बनाया जा रहा है, जो पूरी तरह असुरक्षित है. आरोप है कि बिना भूमि सुधार के ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया. नींव की खुदाई मात्र 2 से 2.5 फीट तक की गई है, जो मानकों के विपरीत बताई जा रही है.

घटिया सामग्री के इस्तेमाल का दावा
स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल हो रहा है. पतले सरिया, अधिक बालू और कम सीमेंट के उपयोग के साथ-साथ पिलर की ढलाई भी कमजोर तरीके से की गई है, जिससे भवन की मजबूती पर सवाल उठ रहे हैं.
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विरोध के बावजूद जारी रहा निर्माण
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने शुरुआत में ही इस स्थान पर निर्माण का विरोध किया था, लेकिन संवेदक ने यह कहकर काम जारी रखा कि जमीन स्वीकृत है. उनका आरोप है कि दलदल हटाने या जमीन को मजबूत करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया.

जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में हुआ था शिलान्यास
गौरतलब है कि इस योजना का शिलान्यास विधायक निशात आलम, सांसद विजय कुमार हाँसदा, जिला परिषद अध्यक्ष जुली ख्रिष्टमणि हेम्ब्रम और उपाध्यक्ष अशोक कुमार भगत की मौजूदगी में किया गया था. योजना का उद्देश्य गांव में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना था, लेकिन अब इसकी गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

जांच की मांग और बड़ा सवाल
ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है. उनका कहना है कि अगर समय रहते जांच नहीं हुई, तो यह भवन भविष्य में किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है. अब बड़ा सवाल यह है कि क्या विधायक के शिलान्यास वाली इस योजना में गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है, या फिर जांच के बाद सच्चाई सामने आएगी?
