RIMS रांची में सीनियर रेजिडेंट भर्ती पर उठे सवाल: मेधावी छात्र का आरोप, नियम ताक पर रखकर चहेतों को दी गई नियुक्ति

Ranchi: राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) रांची एक बार फिर विवादों के घेरे में है. इस बार मामला सीनियर रेजिडेंट (एसआर) की भर्ती...

Ranchi: राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) रांची एक बार फिर विवादों के घेरे में है. इस बार मामला सीनियर रेजिडेंट (एसआर) की भर्ती प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं और पक्षपात का है. फिजियोलॉजी विभाग में हुई भर्ती को लेकर एक अभ्यर्थी, डॉक्टर विमलेश कुमार ने स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर गंभीर आरोप लगाए हैं और पूरी चयन प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की है.

मुख्य आरोप: टॉप 20% मानदंड की अनदेखी:

शिकायतकर्ता के अनुसार, फरवरी 2026 में जारी आधिकारिक विज्ञापन के मुताबिक, एमडी और एमएस बैच (2022-2025) के उन अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जानी थी जो अपने विभाग के टॉप 20% में आते हैं. पत्र में दावा किया गया है कि फिजियोलॉजी विभाग में केवल एक ही अभ्यर्थी इस टॉप 20% की श्रेणी में आता था और पद भी उपलब्ध था. आरोप है कि योग्य अभ्यर्थी (शिकायतकर्ता स्वयं) को दरकिनार कर किसी अन्य उम्मीदवार का चयन कर लिया गया.

भाई-भतीजावाद और ‘मनी इन्फ्लुएंस’ का अंदेशा:

डॉ. विमलेश ने आरोप लगाया है कि जिस उम्मीदवार का चयन किया गया है, उनके पिता रिम्स (पूर्व में RMCH) के FMT विभाग में पूर्व फैकल्टी रह चुके हैं. अभ्यर्थी का कहना है कि चयन प्रक्रिया में निष्पक्षता के बजाय ‘पसंदीदा उम्मीदवार को लाभ पहुंचाने के लिए एम्स दिल्ली की नियमावली (जिसे आमतौर पर रिम्स फॉलो करता है) की अनदेखी की गई है. इसमें आर्थिक प्रभाव (मनी इन्फ्लुएंस) और भ्रष्टाचार की आशंका भी जताई गई है.

इंटरव्यू प्रक्रिया पर उठाए तकनीकी सवाल:

शिकायत पत्र में इंटरव्यू के दौरान हुई एक और बड़ी गलतियों का जिक्र किया गया है. पत्र के अनुसार, जब इंटरव्यू में एससी और एसटी वर्ग का कोई भी अभ्यर्थी उपस्थित नहीं था, तो उस प्रतिनिधि को अनारक्षित अभ्यर्थियों को अंक देने का अधिकार किस आधार पर दिया गया? शिकायतकर्ता का तर्क है कि ऐसी स्थिति में प्रतिनिधि की भूमिका केवल एक पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर) तक सीमित होनी चाहिए थी, न कि सक्रिय रूप से अंक देने की.

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अपर मुख्य सचिव से की गई ये मांग:

  • डॉक्टर विमलेश कुमार ने 10 अप्रैल को सौंपे गए अपने शिकायती पत्र में कई मांग रखी है.
  • संपूर्ण भर्ती प्रक्रिया, विशेषकर फिजियोलॉजी विभाग की गहन और निष्पक्ष जांच हो.
  • भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी या पक्षपात के कोण से मामले की पड़ताल की जाए.
  • दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई हो.
  • जांच पूरी होने तक अंतिम परिणाम और नियुक्ति की घोषणा पर तुरंत स्टे लगाया जाए.
  • पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि साल 2025 में भी फिजियोलॉजी विभाग के ही एक पूर्व पीजी छात्र द्वारा टॉपर लिस्ट में गड़बड़ी का आरोप लगाया गया था, जो संस्थान की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है.
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