– 2009–2014 के मामलों की जांच: करीब 5.5 करोड़ की खरीद पर सवाल.
– टेंडर प्रक्रिया और वीसी के विशेषाधिकार के दुरुपयोग की पड़ताल तेज.
रांची. कांके के मनातू स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड (सीयूजे) में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा की तीन दिन चली छापेमारी गुरुवार को पूरी हो गई. टीम 2009 से 2014 के बीच विश्वविद्यालय में हुई खरीद और नियुक्तियों से जुड़ी अनियमितताओं की जांच के लिए पहुंची थी.कार्रवाई के दौरान विभिन्न योजनाओं से संबंधित 100 से अधिक फाइलें जब्त की गई हैं, जिनमें फर्नीचर खरीद और टेंडर प्रक्रिया से जुड़े अहम दस्तावेज शामिल हैं. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि तत्कालीन कुलपति ने अपने विशेषाधिकार का विवेकहीन उपयोग करते हुए लैब सामग्री और फर्नीचर की खरीद में अनियमितताएं बरतीं. निम्न गुणवत्ता वाले फर्नीचर को निर्धारित दर से कई गुना अधिक कीमत पर खरीदे जाने के संकेत मिले हैं. करीब साढ़े पांच करोड़ रुपए की खरीद से जुड़ी फाइलें भी जब्त की गई हैं, जिनकी अब विस्तृत जांच होगी. संबंधित ठेका दिए जाने और निविदा प्रक्रिया में बिना ठोस कारण टेंडर रद्द कर पुनः जारी करने जैसे बिंदु भी जांच के दायरे में हैं.

जांच में आया सामने-नियुक्तियों में नियमों की अनदेखी की गई:
सीबीआइ की छानबीन में यह भी पाया गया कि सह प्राध्यापक, सुरक्षा अधिकारी समेत कई पदों पर नियुक्तियों में नियमों की अनदेखी की गई. अयोग्य अभ्यर्थियों को योग्य घोषित करने और जाली दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति देने के आरोपों से जुड़े दस्तावेज एजेंसी को मिले हैं, जिनका सत्यापन किया जा रहा है.एजेंसी अब जब्त फाइलों और वित्तीय ट्रेल के आधार पर जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका तय करेगी. कार्रवाई के बाद परिसर और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज है. जांच एजेंसी ने संकेत दिया है कि दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच और संबंधित अधिकारियों से पूछताछ के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

