News Desk: आज राजधानी रांची का समाहरणालय परिसर किसी किले में तब्दील हो चुका है. मौका है नवनिर्वाचित पार्षदों के शपथ ग्रहण समारोह और उसके ठीक बाद होने वाले डिप्टी मेयर (उप-महापौर) के चुनाव का .सुरक्षा इतनी कड़ी है कि परिंदा भी पर नहीं मार सकता; बिना आधिकारिक अनुमति के किसी भी आम इंसान का प्रवेश वर्जित है.

महागठबंधन बनाम बीजेपी: बाहर का माहौल गर्म
भले ही समाहरणालय के अंदर सन्नाटा और अनुशासन हो, लेकिन बाहर की सड़क जनता के जोश और नारों से गूंज रही है. समर्थकों का हुजूम उमड़ पड़ा है और हर कोई अपने चहेते पार्षद की जीत का दावा कर रहा है.
प्रमुख बिंदु जो चर्चा का विषय बने हुए हैं:
महागठबंधन का पलड़ा भारी: जमीन पर मौजूद लोगों और राजनीतिक जानकारों की मानें तो इस बार महागठबंधन समर्थित उम्मीदवार की जीत तय मानी जा रही है.
बीजेपी रेस से बाहर?
भीड़ में चर्चा आम है कि भारतीय जनता पार्टी इस बार समीकरणों में पिछड़ गई है और डिप्टी मेयर की कुर्सी उसके हाथ से फिसल चुकी है.
सुरक्षा का ‘चक्रव्यूह’:
समाहरणालय के चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात है. अंदर जाने वाले हर व्यक्ति की सघन जांच की जा रही है ताकि चुनाव प्रक्रिया में कोई खलल न पड़े.
किसके सिर सजेगा ताज?
पार्षदों ने शपथ ले ली है और अब बारी है उस ‘नंबर गेम’ की, जो रांची नगर निगम की अगली दिशा तय करेगा. क्या जनता की भविष्यवाणी सही साबित होगी और महागठबंधन अपना परचम लहराएगा? या फिर अंतिम समय में कोई बड़ा उलटफेर देखने को मिलेगा?
देखना दिलचस्प होगा कि जनता के दावों में कितना दम है और शाम तक रांची को अपना नया ‘डिप्टी मेयर’ किस खेमे से मिलता है.

