Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची के ग्रुप केन्द्र में गुरुवार को केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) द्वारा शौर्य दिवस अत्यंत सम्मान और गरिमा के साथ मनाया गया. इस विशेष अवसर पर बल के उन वीर सपूतों को याद किया गया जिन्होंने देश की सीमाओं की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी.
शहीद स्मारक पर दी गई श्रद्धांजलि
कार्यक्रम का शुभारंभ ग्रुप केन्द्र परिसर स्थित शहीद स्मारका पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुआ. झारखंड सेक्टर के आईजी साकेत कुमार सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में शहीदों को नमन किया. उनके साथ डीआईजी डीएन लाल एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी पुष्पचक्र अर्पित कर वीर जवानों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी.
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ऐतिहासिक विजय की गौरव गाथा
जवानों को संबोधित करते हुए महानिरीक्षक साकेत कुमार सिंह ने 9 अप्रैल 1965 के उस ऐतिहासिक संघर्ष को याद किया, जिसने सीआरपीएफ के नाम को स्वर्णाक्षरों में दर्ज कर दिया. 1965 में गुजरात के रण ऑफ कच्छ में पाकिस्तान की एक पूरी इन्फैंट्री ब्रिगेड (लगभग 3500 सैनिक) ने सरदार और टाक चौकियों पर हमला कर दिया था. दुश्मन की भारी संख्या के सामने मात्र 120 जवान डटे रहे. इस भीषण संघर्ष में 34 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और चार को बंदी बना लिया गया, हालांकि इस वीरतापूर्ण युद्ध में सीआरपीएफ के 8 जवान भी शहीद हुए.
वीर नारियों और पदक विजेताओं का सम्मान
यह दिन केवल इतिहास को याद करने का ही नहीं, बल्कि वर्तमान के नायकों और उनके परिवारों के प्रति आभार व्यक्त करने का भी रहा. कार्यक्रम में विशेष रूप से रांची जिले की 16 वीर नारियों (शहीद जवानों की पत्नियां) को आमंत्रित किया गया था. मुख्य अतिथि ने उन्हें उपहार देकर सम्मानित किया और उनके त्याग को नमन किया. अदम्य साहस का परिचय देने वाले अधिकारियों और जवानों को वीरता पदक एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए.
