Ranchi: झारखंड में उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा की तिथि में बदलाव हो सकता है. उल्लेखनीय है कि झारखंड का महापर्व सरहुल इस बार केवल आस्था और प्रकृति की पूजा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राज्य की राजनीति का नया केंद्र बिंदु बन गया है. आगामी 22 मार्च को होने वाली झारखंड उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज कर दी है. विवाद की मुख्य वजह तिथियों का टकराव है. झारखंड में 21 मार्च को सरहुल का पर्व मनाया जाना है, जबकि इसके ठीक अगले दिन यानी 22 मार्च को सुबह ही उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा आयोजित की गई है. विपक्ष का तर्क है कि सरहुल की रात उत्सव और पारंपरिक रीति-रिवाजों में डूबे रहने के बाद, आदिवासी समाज के अभ्यर्थियों के लिए अगली सुबह परीक्षा केंद्र पहुंचना और परीक्षा देना व्यावहारिक रूप से असंभव होगा.

मामले को लेकर वार-पलटवार : किसने क्या कहा?
बीजेपी के प्रदेश मीडिया सह प्रभारी अशोक बड़ाईक ने राज्य सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि आदिवासियों के सबसे बड़े त्योहार की तारीख तक याद नहीं है. यह सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है. इस पर झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडेय ने पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें बीजेपी से अबुआ सरकार’ होने का सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं है. सरकार के पास फीडबैक पहुंच चुका है. इसके अलावा कांग्रेस के प्रदेश मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा का कहना है कि मामला संज्ञान में आया है और सरकार छात्रों के हित में उचित और जरूरी निर्णय जल्द ही लेगी.

