रांची: झारखंड पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार और लापरवाही के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए रेल डीजी अनिल पालटा ने एक बड़ी कार्रवाई की है. टाटानगर रेलवे स्टेशन पर हुई लूट की वारदात को मामूली मारपीट में बदलकर आरोपियों को बचाने के मामले में दो पुलिस अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है.

जांच में हुआ खुलासा, निलंबित किए गए दोनों SI
सब-इंस्पेक्टर, जीतराम उरांव और कमलेश राम पर आरोप है कि उन्होंने, धाराओं में हेरफेर कर आरोपियों को कानूनी लाभ पहुंचाने की नीयत से लूट जैसी गंभीर घटना को मारपीट की मामूली घटना में तब्दील कर दिया.
केस की डायरी और जांच की दिशा को इस तरह मोड़ा गया कि आरोपियों को कड़ी सजा से बचाया जा सके. मामले का सही तरीके से अनुसंधान नहीं किया गया.
डीजी की समीक्षा में पकड़ी गई चोरी
जब रेल डीजी अनिल पालटा ने लंबित मामलों और जांच की प्रगति की समीक्षा की, तो उनकी पैनी नजर से यह हेरफेर नहीं छिप सका. समीक्षा के दौरान यह स्पष्ट हो गया कि दोनों अधिकारियों ने जानबूझकर केस को कमजोर किया है.मामले की गंभीरता को देखते हुए डीजी ने दोनों को सस्पेंड करने का आदेश जारी कर दिया.
जाने क्या है मामला
यह मामला इसी साल जनवरी महीने का है. जमशेदपुर के टाटानगर रेलवे स्टेशन परिसर में खड़ी एक ट्रेन में एक यात्री के साथ लूटपाट की वारदात हुई थी. पीड़ित ने इस संबंध में टाटानगर रेल थाने में शिकायत दर्ज कराई थी. नियमत इस गंभीर मामले में लूट की धाराओं के तहत जांच होनी चाहिए थी, लेकिन जांच का जिम्मा संभाल रहे दो सब इंस्पेक्टर ने खेल कर दिया

