Ranchi: सेना की जमीन मामले में आरोपी दिलीप घोष की याचिका पर सुनवाई करते हुए झारखंड हाई कोर्ट के न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने मेंटेनबिलिटी पर फैसला सुरक्षित रख लिया है. दिलीप घोष ने पूरे मामले में अपनी संलिप्तता से इनकार करते हुए प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज ECIR को निरस्त करने की मांग को लेकर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.
मेंटेनबिलिटी पर कोर्ट में हुई तीखी बहस
मामले की सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय ने याचिका का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यह IPC 482 के तहत सुनने योग्य नहीं है, ऐसे में इस पर आगे बहस नहीं की जा सकती. वहीं अदालत ने प्रार्थी के अधिवक्ता को सलाह दी कि वे याचिका वापस लेकर क्रिमिनल रिवीजन दायर कर सकते हैं. हालांकि प्रार्थी के अधिवक्ता ने याचिका वापस लेने से इनकार कर दिया और मेंटेनबिलिटी पर अपनी दलीलें पेश कीं.
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने यह तय करने के लिए कि याचिका सुनने योग्य है या नहीं, अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. यदि याचिका मेंटेन करने योग्य पाई जाती है, तो आगे इस पर विस्तृत सुनवाई होगी.
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4.55 एकड़ सेना की जमीन सौदे में गड़बड़ी का आरोप
दरअसल रांची में सेना की 4.55 एकड़ जमीन को कागजी हेरफेर के जरिए बेचे जाने का मामला सामने आया था. यह जमीन जगत बंधु टी स्टेट प्रा. लि. के मालिक दिलीप घोष और कारोबारी अमित अग्रवाल ने खरीदी थी. जमीन की सरकारी कीमत 20 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई थी, जबकि इसे करीब 7 करोड़ रुपये में खरीदा गया.
जांच में सामने आया कि प्रदीप बागची नामक व्यक्ति ने फर्जी रैयत बनकर यह जमीन बेची. रजिस्ट्री में लगाए गए होल्डिंग नंबर से जुड़े दस्तावेज भी जांच में फर्जी पाए गए, जिससे पूरे मामले में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ.
