पलामू: झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) को लेकर राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ डालटनगंज विधायक आलोक चौरसिया ने कड़ा रुख अपनाते हुए हेमंत सोरेन सरकार पर पलामू प्रमंडल के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का सीधा आरोप लगाया है. विधायक ने कहा कि आगामी परीक्षा से भोजपुरी, मगही, अंगिका और मैथिली जैसी क्षेत्रीय भाषाओं को बाहर करना झारखंड के करोड़ों युवाओं की आवाज दबाने और उनका गला घोंटने जैसा कृत्य है.
Also Read: विष्णुगढ़ में नाबालिग के साथ दरिंदगी मामले में पुलिस ने एक दर्जन संदिग्धों को हिरासत में लिया
छात्रों के आत्मविश्वास पर चोट का आरोप
विधायक आलोक चौरसिया ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जेटेट अब पलामू और गढ़वा के अभ्यर्थियों के लिए किसी अभिशाप से कम नहीं रह गया है. वर्षों से कड़ी मेहनत और तैयारी कर रहे छात्रों को जब उनकी अपनी ही मातृभाषा में परीक्षा देने के अवसर से वंचित किया जाता है, तो यह उनके आत्मविश्वास पर गहरी चोट पहुंचाता है. उन्होंने सरकार से मांग की है कि छात्र हित को सर्वोपरि रखते हुए मगही और भोजपुरी को तुरंत परीक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए.
आंदोलन की चेतावनी
सरकार को चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल एक पात्रता परीक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि लाखों युवाओं के रोजगार और सुनहरे भविष्य का सवाल है. पलामू के बच्चों के हितों की रक्षा करना हमारी पहली जिम्मेदारी है. यदि राज्य सरकार ने इस संवेदनशील विषय पर जल्द ही कोई सकारात्मक और ठोस कदम नहीं उठाया, तो बाध्य होकर हमें सड़कों पर उतरना पड़ेगा और एक उग्र जन आंदोलन का शंखनाद किया जाएगा.
