रांची: लोकतंत्र के सबसे बड़े उत्सव ‘चुनाव’ में हर एक वोट की कीमत होती है. इसी भावना को चरितार्थ करते हुए रांची पुलिस ने इस बार न केवल सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाली, बल्कि दिव्यांग और बुजुर्ग मतदाताओं के लिए एक मजबूत संबल बनकर उभरी. लोकतंत्र का सम्मान, हर वोट का मान, संकल्प के साथ रांची पुलिस के जवान बूथों पर दिव्यांग मतदाताओं की मदद करते नजर आए.

पुलिस का मानवीय चेहरा आया सामने
अक्सर पुलिस की छवि सख्त अनुशासन वाली होती है, लेकिन मतदान केंद्रों पर रांची पुलिस का एक अलग ही रूप देखने को मिला. कहीं कोई जवान दिव्यांग मतदाता की व्हीलचेयर को धकेलता नजर आया, तो कहीं बुजुर्गों को अपनी गोद में उठाकर मतदान कक्ष तक पहुंचाया.
पुलिसकर्मियों का यह समर्पण देखकर मतदाताओं के चेहरे पर मुस्कान और लोकतंत्र के प्रति विश्वास और गहरा हो गया. रांची पुलिस प्रशासन ने चुनाव आयोग के निर्देशों का पालन करते हुए विशेष प्रबंध किए थे.
दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले दिव्यांगों को बूथ तक लाने के लिए पुलिस ने सुगम सहयोग प्रदान किया. लंबी कतारों के बावजूद दिव्यांग और वरिष्ठ नागरिकों को बिना इंतजार किए सीधे मतदान करने की सुविधा सुनिश्चित की गई. हर मुख्य मतदान केंद्र पर एक ‘सहायता केंद्र’ बनाया गया था, जहां पुलिसकर्मी मतदाताओं की शारीरिक सहायता के लिए तैनात थे.
बिना किसी बाधा सभी अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके: SSP
एसएसपी राकेश रंजन ने कहा कि हमारा उद्देश्य केवल शांतिपूर्ण मतदान कराना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि समाज का अंतिम व्यक्ति, चाहे वह शारीरिक रूप से अक्षम ही क्यों न हो, बिना किसी बाधा के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके. जब एक दिव्यांग मतदाता वोट डालकर गर्व के साथ अपनी उंगली पर लगी स्याही दिखाता है, तो वह हमारे लोकतंत्र की सबसे खूबसूरत तस्वीर होती है. रांची पुलिस इस गौरव का हिस्सा बनकर खुद को सम्मानित महसूस कर रही है.

