News Desk : पूरी दुनिया में जब भी शांति और सुरक्षा की बात होती है, तो भारतीय सैनिकों का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है. अपनी बहादुरी और अनुशासन के दम पर भारतीय सेना न केवल देश की सीमाओं की रक्षा कर रही है, बल्कि विदेशों में भी अशांत क्षेत्रों में शांति स्थापित करने में अहम भूमिका निभा रही है. भारत की विदेश नीति हमेशा से वैश्विक शांति की समर्थक रही है, इसी वजह से संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों में भारत सबसे ज्यादा सैनिक भेजने वाले देशों में शामिल है. इन मिशनों का उद्देश्य संघर्ष क्षेत्रों में युद्धविराम लागू करना, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और सामान्य जीवन बहाल करना होता है.
Also Read : IDTR जमशेदपुर में छात्रों का भारी बवाल: प्लेसमेंट इंचार्ज के तबादले के विरोध में गेट पर जड़ा ताला
लेबनान से कांगो और दक्षिण सूडान तक सक्रिय भूमिका
मध्य पूर्व के लेबनान में यूएनआईएफआईएल के तहत भारतीय सैनिक तैनात हैं, जहां वे सीमा पर तनाव को नियंत्रित करने और शांति बनाए रखने का काम करते हैं. वहीं अफ्रीका के कांगो में मोनुस्को के तहत भारतीय सेना विद्रोही समूहों से मुकाबला करने के साथ-साथ स्थानीय लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित कर रही है. इसके अलावा दक्षिण सूडान में यूएनएमआईएसएस के अंतर्गत भारतीय सैनिक नागरिकों की रक्षा, राहत कार्यों में सहयोग और बुनियादी सुविधाएं बहाल करने में जुटे हैं.
Also Read : सावन सोमवार 2026: कब से शुरू होगा सावन, जानें सोमवार की तारीख और महत्व
रणनीतिक क्षेत्रों में तैनाती से बढ़ा भारत का वैश्विक प्रभाव
गोलन हाइट्स में यूएनडीओएफ के तहत भारतीय सैनिक कड़ी निगरानी रख रहे हैं, ताकि दोनों देशों के बीच तनाव नियंत्रित रहे. इसके अलावा आर्मेनिया में भारत ने रक्षा संबंधों को मजबूत करने के लिए डिफेंस अताशे तैनात किए हैं. तंजानिया, मोजांबिक, फिलीपींस और जिबूती जैसे देशों में भी भारत की सैन्य मौजूदगी अलग-अलग रूपों में देखी जा सकती है. यह तैनाती न केवल भारत की सैन्य क्षमता को दर्शाती है, बल्कि वैश्विक स्तर पर उसकी बढ़ती भूमिका और प्रभाव को भी मजबूत करती है.
