News Desk:रांची में झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के छठे दिन टेंडर प्रक्रिया, पुल निर्माण, नगरपालिका नियमावली और विकास योजनाओं को लेकर सरकार को कई सवालों का सामना करना पड़ा. सत्ता पक्ष के विधायक हेमलाल मुर्मू ने अपनी ही सरकार को घेरते हुए पूछा कि पीडब्ल्यूडी कोड के अनुसार 180 दिनों में टेंडर का निष्पादन अनिवार्य है, फिर भी 8 दिसंबर को ग्रामीण पुल-सड़क का टेंडर रद्द करने के आदेश के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई. उन्होंने कहा कि कई मामलों में तकनीकी और वित्तीय बिड तक खोल दी गई है.

ग्रामीण विकास मंत्री ने जवाब में बताया कि सीएम ग्राम सड़क योजना के 92, सीएम सड़क सुदृढ़ीकरण के 29 और ग्राम सेतु योजना के 5 टेंडर लंबित हैं. देरी को राज्यहित के खिलाफ बताते हुए उन्होंने 30 दिनों के भीतर निष्पादन या रद्द करने का निर्देश दिए जाने की बात कही.
सत्र के दौरान पुल निर्माण की लागत सीमा का मुद्दा भी गरमाया. मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि पुल के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान है. इस पर स्पीकर ने टिप्पणी की कि राशि सीमित होने से कई परियोजनाएं वर्षों तक अटकी रहती हैं और वे स्वयं 15 वर्षों से एक पुल निर्माण के लिए प्रयासरत हैं.
*नगरपालिका सेवा संवर्ग नियमावली 2025* के गठन पर मंत्री सुदिव्य सोनू ने कहा कि प्रक्रिया जारी है और तीन महीने के भीतर नियमावली लागू कर दी जाएगी, जिससे वेतन विसंगतियां दूर होंगी. मोटरयान निरीक्षक के 21 नए पद सृजित किए जाने और 31 दिसंबर तक अधियाचना भेजने की जानकारी मंत्री दीपक बिरूआ ने दी.
वहीं मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने बताया कि पिछले दो महीनों में 18,061 चापानलों की मरम्मत की गई है और सभी चापानलों को दुरुस्त करने का लक्ष्य है. पुनासी जलाशय योजना को स्टेज-वन फॉरेस्ट क्लीयरेंस मिल चुका है और आगे की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी.
बजट सत्र में टेंडर में देरी, विकास योजनाओं की प्रगति और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिशें जारी रहीं.

