विनीत आभा उपाध्याय

रांची: झारखंड स्टेट बार काउंसिल के चुनाव की सरगर्मी अपने चरम पर है. 12 मार्च को होने वाले मतदान से पहले प्रत्याशियों ने कचहरी परिसरों में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. एक तरफ जहां नए चेहरे बदलाव के वादे के साथ मैदान में हैं वहीं निवर्तमान कमेटी के सदस्य अपनी उपलब्धियां गिनाकर दोबारा मौका मांग रहे हैं.
वकीलों के बीच कामकाज का आकलन
लेकिन इस बार वकीलों के बीच कामकाज के आकलन ने चुनावी मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया है. काउंसिल के चुनाव में इस बार केवल वादे ही नहीं बल्कि पिछले कार्यकाल के दौरान हुए विवाद भी केंद्र में हैं. अधिवक्ताओं के बीच मुख्य रूप से दो मुद्दों ने निवर्तमान सदस्यों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.
Read Also: अपराधियों का नया डिजिटल ट्रैप: CSP संचालक अनजाने में बन रहे अपराध के साझेदार
TA-DA विवाद फिर बना चुनावी मुद्दा
लगभग दो साल पहले शुरू हुआ TA-DA (यात्रा और दैनिक भत्ता) विवाद एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है. अधिवक्ताओं का एक बड़ा समूह काउंसिल के फंड का उपयोग नियम विरुद्ध तरीके से किए जाने के मामले को लेकर लगातार चर्चा कर रहा है और पहली बार चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों ने भी इसे मुद्दा बना दिया है.निवर्तमान कमेटी के ज्यादातर सदस्य इस बार भी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं. उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती वोटरों को यह समझाना है कि पिछले कार्यकाल के दौरान लगे आरोप निराधार हैं. वहीं मतदाता अब चेहरा देखकर नहीं, बल्कि चिट्ठा देखकर वोट देने के मूड में नजर आ रहे हैं.
Read Also: झारखंड पुलिस: अनुसंधानकर्ताओं स्मार्टफोन के पुराने नियमों में संशोधन की क्यों पड़ी आवश्यकता

