राज्य के उपभोक्ताओं ने बिजली दर बढ़ाने के आवेदन को एक सिरे से किया खारिज, कहा कंज्यूमर पर डाला जा रहा बोझ

रांची : रांची के आईएमए भवन में शनिवार को झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा आयोजित जनसुनवाई में बिजली टैरिफ बढ़ाने के...

रांची : रांची के आईएमए भवन में शनिवार को झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा आयोजित जनसुनवाई में बिजली टैरिफ बढ़ाने के प्रस्ताव का जोरदार विरोध हुआ. उपभोक्ताओं, उद्योग प्रतिनिधियों और विभिन्न संगठनों ने एक स्वर में कहा कि पहले से ही बिजली महंगी है, ऐसे में दर बढ़ाना राज्य की अर्थव्यवस्था और उद्योगों के लिए नुकसानदायक होगा. उनका कहना था कि टैरिफ वृद्धि का सीधा बोझ आम उपभोक्ताओं और छोटे उद्योगों पर डाला जा रहा है.

टैरिफ वृद्धि पर उद्योग जगत की चिंता

लघु उद्योग भारती रांची महानगर के मंत्री सत्य प्रकाश पाण्डेय ने आयोग को दिए आवेदन में कहा कि झारखंड में प्रति व्यक्ति आय कम और गरीबी दर अधिक है. ऐसे में बिजली दर बढ़ाने से छोटे और मध्यम उद्योगों की उत्पादन क्षमता प्रभावित होगी और कई इकाइयों के बंद होने की स्थिति बन सकती है. उन्होंने वितरण हानि 25.60 प्रतिशत बताए जाने पर भी सवाल उठाए और कहा कि इसका भार उपभोक्ताओं पर डालना उचित नहीं है. जनसुनवाई में वक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि पहले व्यवस्था में सुधार और दक्षता बढ़ाने पर ध्यान दिया जाए, उसके बाद ही किसी टैरिफ वृद्धि पर विचार हो.

राजस्व कमी और वितरण हानि पर उठे सवाल

एडवोकेट गर्गी श्रीवास्तव ने कहा कि ऑडिटेड खातों के अनुसार वितरण निगम द्वारा बताई गई राजस्व कमी सही नहीं है. उनके मुताबिक घाटे के बजाय लगभग 1000 करोड़ रुपये का अधिशेष सामने आता है. ऐसी स्थिति में टैरिफ बढ़ाने के बजाय कम किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि वितरण हानि निगम की अक्षमता का परिणाम है और इसका भार औद्योगिक उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाना चाहिए.

ईशिता पोद्दार ने भी टैरिफ वृद्धि का विरोध करते हुए कहा कि उद्योगों की लागत का लगभग एक-तिहाई हिस्सा बिजली पर खर्च होता है. दर बढ़ने से उद्योग प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाएंगे. उन्होंने वितरण निगम से खर्चों पर नियंत्रण और कार्य दक्षता बढ़ाने की मांग की.

बकाया वसूली और पारदर्शिता पर जोर

जेसिया अध्यक्ष अंजय पचेरिवाल ने बताया कि 6700 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली लंबित है, जिसमें बड़ी राशि कानूनी मामलों में फंसी है. उन्होंने कहा कि पहले बकाया वसूली और वित्तीय प्रबंधन सुधार पर ध्यान दिया जाए. बिलिंग दक्षता कमजोर होने, दूरस्थ क्षेत्रों में व्यवस्था दुरुस्त करने और प्रीपेड मीटर लगाने की जरूरत पर भी जोर दिया गया. सुरक्षा जमा पर ब्याज भुगतान और आंकड़ों में पारदर्शिता की कमी का मुद्दा भी उठाया गया.

उपभोक्ताओं ने एटीएंडसी लॉस कम करने के आगामी लक्ष्यों को अवास्तविक बताया और कहा कि जब तक वास्तविक सुधार नहीं होते, तब तक बिजली दर में किसी भी प्रकार की वृद्धि नहीं की जानी चाहिए. उन्होंने मांग की कि वितरण व्यवस्था, बिलिंग प्रणाली और वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता और सुधार सुनिश्चित किया जाए.

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *