Ranchi: झारखंड के अस्पतालों से निकलने वाला बायो-मेडिकल कचरा अब न तो सड़कों पर दिखेगा और न ही इसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त की जाएगी. स्वास्थ्य विभाग ने जन-स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक सख्त और फुलप्रूफ प्लान तैयार किया है. अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह तय किया गया कि अब कचरे के डिब्बे से लेकर उसके अंतिम निस्तारण तक हर गतिविधि पर बारकोडिंग और जीपीएस के जरिए नजर रखी जाएगी.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सख्त नियम लागू
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर राज्य के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों के लिए नई नियमावली अनिवार्य की जाएगी. इसके तहत अस्पताल अब उपचार रहित कचरे को 48 घंटे से अधिक समय तक स्टोर नहीं कर पाएंगे.
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नियम तोड़ने पर जुर्माना और रजिस्ट्रेशन रद्द
कचरा उठाने से लेकर उसे नष्ट करने तक की पूरी प्रक्रिया में बारकोडिंग और जीपीएस ट्रैकिंग का कड़ाई से पालन होगा. नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा, साथ ही उनका रजिस्ट्रेशन भी रद्द किया जा सकता है. जिन स्थानों पर ट्रीटमेंट प्लांट उपलब्ध नहीं हैं, वहां मानकों के अनुसार डीप बरियल जैसे विकल्पों का इस्तेमाल किया जाएगा.
