रांची: झारखंड राज्य वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा (जेएसी) के तत्वावधान में मंगलवार को विधानसभा के समक्ष आयोजित महाधरना में हजारों शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर हुंकार भरी. बार-बार जांच के नाम पर स्कूल-कॉलेजों को परेशान करने और अनुदान में देरी के विरोध में मोर्चा ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है. इस दौरान सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया, कि अप्रैल माह के दूसरे सप्ताह में हजारों शिक्षक जैक कार्यालय का घेराव करेंगे.

प्रमुख निर्णय और आंदोलन की रूपरेखा:
महाधरना के दौरान शिक्षकों ने सरकार और विभाग के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए आगामी कार्यक्रमों की घोषणा की. अप्रैल के दूसरे सप्ताह में जैक कार्यालय का भव्य घेराव किया जाएगा. इसके बाद राज्यभर के वित्त रहित शिक्षक और कर्मचारी मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करेंगे. अप्रैल के प्रथम सप्ताह में राजभवन के समक्ष महाधरना देकर महामहिम राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा जाएगा.
अनुदान के बहिष्कार की घोषणा
यदि 23 मार्च तक अनुदान की राशि संस्थानों के खाते में नहीं पहुंची, तो शिक्षक राशि लेने से इनकार कर देंगे, ताकि राशि लैप्स होने की पूरी जिम्मेदारी विभाग की हो. धरना स्थल पर पहुंचे मांडू विधायक निर्मल महतो ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा,आप पिछले 25-30 वर्षों से बिना वेतन के राज्य के 4 लाख बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं. आपकी मांगें जायज हैं और मैं सदन के अंदर और बाहर आपके लिए लड़ता रहूंगा. उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि यदि शिक्षक मुख्यमंत्री आवास का घेराव करते हैं, तो वे स्वयं उनके साथ खड़े रहेंगे.
विभागीय लापरवाही और पोर्टल की गड़बड़ी पर आक्रोश
मोर्चा के नेताओं ने कहा कि स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के पोर्टल में भारी गड़बड़ी है, जिससे अपलोड किए गए कागजात गायब हो जाते हैं. नेताओं ने सवाल उठाया कि जब जिला शिक्षा पदाधिकारियों ने हार्ड कॉपी विभाग को भेज दी है और जियो टैगिंग से जांच हो चुकी है, तो फिर कागजात का बहाना बनाकर अनुदान रोकना तर्कसंगत नहीं है.
मोर्चा की मुख्य 4 सूत्री मांगें
- अनुदान में 75% की वृद्धि.
- कार्मिक विभाग के पत्र पर कार्रवाई
- सावित्रीबाई फुले योजना
- लंबित अनुदान
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