रांचीः विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने कहा कि 18 मार्च 2026 तक संचालित झारखंड विधानसभा का यह बजट सत्र, कुल 17 कार्य दिवस हुए. यद्यपि यह सत्र 19 मार्च तक प्रस्तावित था, लेकिन 14 मार्च को अवकाश के दिन सदन का कार्य किया गया. फलस्वरूप एक दिन पूर्व आज ही इसका समापन हो रहा है. इस पूरे सत्र की कार्यवाही पर दृष्टिपात करने पर यह स्पष्ट होता है, कि यह सत्र कई दृष्टियों से अत्यंत सार्थक, उपयोगी और ऐतिहासिक रहा है, जिस प्रकार आप सभी माननीय सदस्यों ने, चाहे सत्तापक्ष हों या विपक्ष, सदन की कार्यवाही को गरिमा, संयम और सह्योग की भावना से संचालित करने में योगदान दिया, वह लोकतांत्रिक परम्पराओं का एक उत्कृष्ट उदाहरण है.

242 अल्सूचित प्रश्न स्वीकृत किए गए
इस बजट सत्र में कुल 242 अल्सूचित प्रश्न स्वीकृत किए गए, जिनमें से 62 प्रश्नों के उत्तर सदन में दिए गए. इसी प्रकार कुल 758 तारांकित प्रश्न पूछे गए, जिनमें से 57 प्रश्नों का उत्तर सदन में दिया गया. ध्यानाकर्षण सूचनाओं कि बात करें, तो कुल 72 ध्यानाकर्षण सूचनाएं ली गई, जिनमें से 55 का उत्तर सदन में दिया गया. इस सत्र के दौरान कुल 96 निवेदन प्राप्त हुए. शून्यकाल की सूचनाएं कुल 400 स्वीकृत हुई. यह आंकड़े इस बात के साक्षी हैं, कि सदस्यगण राज्य की जनसमस्याओं के प्रति कितने सजग और उत्तरदायी हैं. सत्र के दौरान सदन की कार्यक्षमता भी उल्लेखनीय रही. जहां इस सत्र के लिए कुल 66 घंटे का समय निर्धारित किया गया था. वहीं सदन ने कुल पौने 74 घंटे काम किया, जो निर्धारित कार्य का लगभग 112 फीसदी है. यह अपने आप में एक रिकाॅर्ड है और यह दर्शाता है कि हम सभी ने मिलकर समय का सदुपयोग किया.
दो महत्वपूर्ण वित्तीय विधेयक पारित किए गए
इस सत्र में दो महत्वपूर्ण वित्तीय विधेयक पारित किए गए. वित्तीय वर्ष 2025-26 का तृतीय अनुपूरक बजट एवं वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट, जिसकी कुल राशि 1 लाख 58 हजार 560 करोड़ रुपये है. यह बजट राज्य के समग्र विकास के दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. इसके अतिरिक्त, झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक, 2026 भी सदन द्वारा पारित किया गया, जो राज्य के उच्च शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा. यह विधेयक झारखंड राज्य के सभी विश्वविद्यालयों को एक समान ढ़ाचे में लाकर उनकी कार्य प्रणाली को बेहतर, पारदर्शी और प्रभावी बनाने का प्रयास करता है. इसका उद्देश्य उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाना, शोध और नवाचार को प्रोत्साहित करना, छात्रों को बेहतर सुविधाएं और समान अवसर प्रदान करना है. विधायी कार्यों की यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है, कि यह सदन केवल चर्चा का मंच नहीं, बल्कि निर्णय और विकास का केन्द्र है.
ई-विधान प्रणाली का आंशिक रूप से सफल उपयोग किया गया
इस सत्र की एक विशेष उपलब्धि यह भी रही कि इसमें ई-विधान प्रणाली का आंशिक रूप से सफल उपयोग किया गया. सभी सदस्यों ने अपने शून्यकाल की सूचनाएं घर बैठे ही पोर्टल के माध्यम से प्रस्तुत की, जिससे उन्हें पूर्व की भांति रात्रि के समय सभा सचिवालय आने की आवश्यकता नहीं पड़ी. साथ ही, विधानसभा सचिवालय द्वारा कार्यसूची भी पोर्टल पर समय से अपलोड की गई, जिससे माननीय सदस्यों को सदन के कार्यों की पूर्व जानकारी प्राप्त हो सकी. यह एक सकारात्मक और आधुनिक पहल है, जिसने कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, सरल और प्रभावी बनाया है. मुझे पूर्ण विश्वास है कि आने वाले सत्र में हम सभी मिलकर छम्ट प्रणाली को पूर्ण रूप से अपनाते हुए एक डिजिटल और सशक्त विधान सभा की दिशा में आगे बढ़ेंगे. मुझे यह कहते हुए अत्यंत संतोष हो रहा है, कि यह सत्र अत्यंत अनुशासित और शांतिपूर्ण रहा. प्रश्नकाल के दौरान केवल एक दिन 30 मिनट का अल्पकालिक स्थगन हुआ, इसके अतिरिक्त सदन की कार्यवाही निर्बाध रूप से चलती रही.
लोकतंत्र की यही खूबसूरती है कि विचारों में मतभेद होते हुए भी उद्देश्य एक होता है- जनहित
लोकतंत्र की यही खूबसूरती है कि विचारों में मतभेद होते हुए भी उद्देश्य एक होता है-जनहित. यह सदन केवल विधेयक पारित करने का स्थान नहीं है, बल्कि यह जनता की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है. यहां व्यक्त हर विचार, हर प्रश्न और हर बहस राज्य की साढ़े तीन करोड़ जनता की आवाज होती है. हमारा राज्य एक युवा राज्य है और अपार संभावनाओं से भरा हुआ है. इस सत्र के दौरान जो चर्चाएं निर्णय और विधेयक पारित हुए हैं, वे निश्चित रूप से राज्य के विकास को नई दिशा देंगे. हम सबकी जिम्मेदारी है कि हम इस सदन की गरिमा को बनाए रखते हुए जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता दें और लोकतंत्र को और अधिक सशक्त बनाएं.
स्पीकर ने कहा-
’विचारों का संगम है यह सदन हमारा,
यहां हर मत का सम्मान है प्यारा.
विपक्ष हो या सत्ता, सबका एक ही ध्येय,
जनता की सेवा, यही हमारा पथ और लक्ष्य है.’’
‘‘मुट्ठी में विश्वास लेकर, कदम बढ़ाते जाएं,
जनता के सपनों को साकार बनाते जाएं.
यह सदन केवल भवन नहीं, एक संकल्प है,
झारखंड के उज्ज्वल भविष्य का विकल्प है. ’’
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