रांचीः झारखंड विधानसभा में चल रहे बजट सत्र के अंतिम दिन सीएम हेमंत सोरेन ने अपने समापन भाषण में कहा कि सदन सिर्फ पक्ष- विपक्ष के बहस का स्थान नहीं, बल्कि राज्य की दिशा और दशा भी तय करता है. बजट सत्र काफी महत्वपूर्ण होता है. राज्य की साढ़े तीन करोड़ जनता की नजर इस पर रही है. विपक्ष की भूमिका की बहुत बड़ी होती है. विपक्ष सदन का अभिन्न अंग है.

सीमिति संसाधन में भी असंभव भी हो सकता है संभव
पिछले छह साल में सरकार ने कई चुनौतियां देखी. कई परिस्थितियां सामने आईं. राज्य में सिंगल इंजन की सरकार है. दृढ़ता के साथ लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा कर रहे हैं. सामाजिक सौहार्द को बनाया है. पूरा राज्य शांत और सौहार्दपूर्ण वातावरण में चल रहा है. अगर दृष्टि स्पष्ट हो और संकल्प दृढ़ हो, तो सीमिति संसाधन में भी असंभव भी संभव हो सकता है.
अधिकारों की रक्षा का प्रयास किया गया
राज्य के हर नागरिक की समाजिक सुरक्षा, भरपेट भोजन, स्वास्थ्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को प्राथमिकता दी गई है. यह मूलधर्म है. आज विपक्ष आलोचना करते हैं. छह साल पहले उन्हें विपक्ष में बिठा दिया. झारखंड के कार्यों की चर्चा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही है. वंचितों के साथ आदिवासियों मूलवासियों के अधिकारों की रक्षा का प्रयास किया गया है. छह साल पहले बजट 86 हजार करोड़ था, जो अब बढ़कर एक लाख 58 हजार करोड़ का हो गया है. छह साल में 85 फीसदी की वृद्धि हुई है.
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