रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सदन को संबोधित कर रहे है. अपने विदाई भाषण में मुख्यमंत्री ने सदन की महत्ता, सरकार की उपलब्धियों और विपक्ष की भूमिका पर खुलकर अपनी बात रखी. उन्होंने स्पष्ट किया कि विधानसभा केवल पक्ष-विपक्ष की बहस का अखाड़ा नहीं, बल्कि राज्य के सवा तीन करोड़ जनता की उम्मीदों का मंदिर है.

लोकतंत्र का स्तंभ है सदन:
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि देश की जनता विधानसभा और लोकसभा को बड़ी आशा भरी नजरों से देखती है. उन्होंने कहा, यह सदन केवल बहस करने का स्थान नहीं है, बल्कि यह राज्य की दिशा और दशा तय करता है. विशेषकर बजट सत्र अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसी से राज्य के विकास का रोडमैप तैयार होता है जिसे प्रदेश की जनता बड़ी बारीकी से देखती है. उन्होंने सुचारू रूप से सदन चलाने के लिए विधानसभा अध्यक्ष का आभार व्यक्त किया और सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेने वाले सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के सभी सदस्यों को धन्यवाद दिया.
चुनौतियों के बीच सामाजिक सौहार्द का ताना-बाना:
पिछले छह वर्षों के कार्यकाल का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि झामुमो गठबंधन की सरकार कई विषम परिस्थितियों से गुजरी है. उन्होंने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्ववर्ती शासनकाल की व्यवस्था कैसी थी, यह किसी से छिपा नहीं है. सरकार ने सामाजिक ताने-बाने को मज़बूत किया है. आज राज्य पूरी तरह से सामाजिक सौहार्द के साथ प्रगति की राह पर है.
विपक्ष की आलोचना और सरकार की मजबूती:
विपक्ष के हमलों पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका बहुत बड़ी होती है. उन्होंने कहा,विपक्ष के साथी जितने जोर-शोर से प्रश्न पूछते हैं और जितनी मजबूती से आलोचनाएं करते हैं, हमारी सरकार उतनी ही मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है. उनकी हर गतिविधि और हमारे काम करने के तरीके को जनता देख रही है और वही अंतिम न्याय करेगी.
शिक्षा, स्वास्थ्य और वैश्विक पहचान:
मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की प्राथमिकताओं को गिनाते हुए कहा कि झारखंड आज शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है. उन्होंने गर्व के साथ साझा किया कि आज झारखंड सरकार के कल्याणकारी कार्यों की चर्चा न केवल राष्ट्रीय स्तर पर, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी हो रही है.

