Ranchi: भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि झारखंड में शासन व्यवस्था की स्थिति बेहद चिंताजनक हो चुकी है. हेमंत सरकार अब अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन स्वयं नहीं कर रही, बल्कि न्यायालयों की फटकार के बाद ही हरकत में आती है. यह सरकार “फटकार आधारित शासन” चला रही है. जब तक उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय कड़ी टिप्पणी नहीं करता, तब तक सरकार महत्वपूर्ण निर्णयों को टालती रहती है. राज्य में निकाय चुनाव वर्षों तक लंबित रखे गए, लेकिन उच्च न्यायालय की सख्ती के बाद ही चुनाव कराए गए. पंचायत सचिव अभ्यर्थियों की नियुक्ति भी लंबे समय तक अटकी रही, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद ही सरकार को प्रक्रिया पूरी करनी पड़ी.
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संवैधानिक पदों को भरने में सरकार रही विफल : प्रतुल
प्रतुल शाहदेव ने कहा कि सूचना आयुक्तों और लोकायुक्त जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों को भरने में भी सरकार पूरी तरह विफल रही. उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद ही चयन समिति की बैठक की तिथि तय की गई. इसी प्रकार थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने जैसी आवश्यक व्यवस्था भी न्यायालय के आदेश के बाद ही शुरू की गई. नियुक्तियों, प्रशासनिक फैसलों और कानून-व्यवस्था से जुड़े कई मामलों में न्यायालय को बार-बार हस्तक्षेप करना पड़ा है. यह दर्शाता है कि सरकार अपनी जिम्मेदारियों से बच रही है और केवल दबाव में काम कर रही है.
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