खुशी राम-बिहारी लाल की कहानी: 1947 में सब खोया, आज चावल के कारोबार से अरबों की विरासत

  News Desk: क्या आप जानते हैं कि मशहूर India Gate Basmati Rice ब्रांड की शुरुआत किन लोगों ने की थी? इसके...

 

News Desk: क्या आप जानते हैं कि मशहूर India Gate Basmati Rice ब्रांड की शुरुआत किन लोगों ने की थी? इसके पीछे दो दूरदर्शी व्यापारी—Khushi Ram और Bihari Lal—का बड़ा योगदान रहा.साल 1889 में अविभाजित भारत (आज का Pakistan) में एक छोटे से चावल व्यापार से शुरू हुआ उनका सफर आज एक विशाल कारोबारी साम्राज्य में बदल चुका है.

1947 के Partition के दौरान उन्हें अपना सब कुछ छोड़कर भारत आना पड़ा, लेकिन कठिन हालात के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और फिर से कारोबार खड़ा किया. समय के साथ यही व्यापार आगे बढ़कर KRBL Limited बना, जो आज हजारों करोड़ रुपये के कारोबार के साथ दुनिया की प्रमुख राइस मिलिंग कंपनियों में शामिल है. अब बदलते वैश्विक हालात और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव जैसी चुनौतियां भी इस कंपनी के सामने नई परीक्षाएं खड़ी कर रही हैं.

पाकिस्तान की धरती से हुई थी शुरुआत

KRBL Limited का नाम इसके संस्थापकों Khushi Ram और Bihari Lal के नाम के पहले अक्षरों से बना है. कंपनी की शुरुआत 1889 में अविभाजित भारत के लायलपुर, आज के Faisalabad ( Pakistan ) में एक छोटे कृषि व्यापार से हुई थी. समय के साथ दोनों भाइयों ने चावल, गेहूं और अन्य कृषि उत्पादों के कारोबार को बढ़ाते हुए राइस मिल, कॉटन यूनिट और कमीशन एजेंसी जैसे कई काम खड़े किए. ईमानदारी और सही लेन-देन की वजह से बाजार में उनकी मजबूत साख बन गई थी.

बंटवारे का दौर: जब नए सिरे से शुरू हुआ सफर

1947 के Partition ने Khushi Ram और Bihari Lal के कारोबार को गहरा झटका दिया. बंटवारे के दौरान उन्हें Pakistan में अपनी लगभग पूरी संपत्ति छोड़कर भारत आना पड़ा. भारत पहुंचने के बाद उन्होंने Delhi के लाहौरी गेट और नया बाजार इलाके से दोबारा छोटे स्तर पर चावल और तेल का व्यापार शुरू किया. कठिन हालात के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और यहीं से अपने कारोबार को फिर से खड़ा करने की शुरुआत की.

फर्श से अर्श तक: ‘इंडिया गेट’ ब्रांड की शुरुआत

भारत में दोबारा बसने के बाद KRBL Limited ने अपना ध्यान पूरी तरह राइस मिलिंग कारोबार पर लगाया और Ghaziabad ( Uttar Pradesh ) में अपनी पहली यूनिट स्थापित की. समय के साथ अगली पीढ़ी, खासकर Anil Kumar Mittal के नेतृत्व में कंपनी ने तेजी से विस्तार किया और मशहूर India Gate Basmati Rice ब्रांड को वैश्विक पहचान दिलाई.

आज यह कंपनी भारत की प्रमुख इंटीग्रेटेड बासमती कंपनियों में गिनी जाती है और Bombay Stock Exchange के आंकड़ों के अनुसार इसका मार्केट कैप लगभग 7,000 करोड़ रुपये के आसपास पहुंच चुका है.

ईरान तनाव से एक्सपोर्ट पर दबाव

भारतीय बासमती चावल के लिए Iran लंबे समय से एक बड़ा बाजार रहा है, जहां KRBL Limited जैसी कंपनियां बड़े स्तर पर एक्सपोर्ट  करती रही हैं. लेकिन मार्च 2026 में United States, Israel और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने इस व्यापार को प्रभावित करना शुरू कर दिया है.

इसी बीच Indian Rice Exporters Federation ने निर्यातकों को सलाह दी है कि वे फिलहाल ईरान और खाड़ी देशों के खरीदारों के साथ नए CIF (कॉस्ट, इंश्योरेंस और फ्रेट) कॉन्ट्रैक्ट करने में सावधानी बरतें, क्योंकि मौजूदा हालात में शिपमेंट में रुकावट और लागत बढ़ने का खतरा बना हुआ है.

भारत हर साल करीब 60 लाख टन बासमती चावल विदेशों में भेजता है. इसकी सबसे ज्यादा मांग मध्य पूर्व के देशों—जैसे Saudi Arabia, Iraq, United Arab Emirates और Yemen—से आती है. वहीं Iran भी लंबे समय से भारतीय बासमती का बड़ा खरीदार रहा है.

हालांकि क्षेत्र में जारी तनाव और संघर्ष के कारण इन बाजारों में एक्सपोर्ट की रफ्तार धीमी पड़ गई है और कई शिपमेंट प्रभावित हो रहे हैं.

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