रांची/दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने DGP नियुक्ति से संबंधित अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए झारखंड और उत्तर प्रदेश को यह कारण बताने का निर्देश दिया है कि प्रकाश सिंह बादल जजमेंट के अनुसार डीजीपी की नियुक्ति का प्रस्ताव यूपीएससी को क्यों नहीं भेजा गया है. अदालत अब इस मामले में उक्त राज्यों की ओर से जवाब दाखिल होने के बाद अगली सुनवाई करेगा.
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क्या कहा कोर्ट ने
DGP नियुक्त से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने अलग-अलग राज्यों को कई बिन्दुओं पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने बीते 13 मार्च को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है. चीफ जस्टिस (सीजेआइ) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि जिन राज्यों ने डीजीपी की नियुक्ति के लिए अपना अलग कानून बनाया है, उन्हें उस कानून का पालन करना होगा. लेकिन, जिन राज्यों में ऐसा कोई कानून नहीं है, उन्हें ‘प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ’ मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा.
क्या है प्रकाश सिंह मामले के दिशा-निर्देश
प्रकाश सिंह मामला और यूपीएससी की भूमिका सुप्रीम कोर्ट ने यह व्यवस्था तब दी, जब उसे बताया गया कि झारखंड और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों ने अपनी अलग नियमावली बनाई है. प्रकाश सिंह मामले के दिशा-निर्देशों के अनुसार, राज्य सरकार को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को पात्र अधिकारियों के नाम भेजने होते हैं. यूपीएससी इनमें से तीन सबसे वरिष्ठ अधिकारियों का पैनल चुनता है, जिनमें से राज्य सरकार एक को डीजीपी नियुक्त करती है, जिसका कार्यकाल दो वर्ष का होता है.
