रांची: रांची पुलिस के हाथ एक बड़ी कामयाबी लगी है. एयरपोर्ट थाना कांड संख्या-12/26 के तहत गिरफ्तार अपराधी अमन कुमार सिंह उर्फ मनीष उर्फ कुबेर ने पुलिस के समक्ष दिए अपने स्वीकारोक्ति बयान में राज्य के खूंखार अपराधी गिरोह प्रिंस खान और सुजीत सिन्हा के गठजोड़ का पर्दाफाश किया है. 20 वर्षीय अमन ने बताया कि कैसे स्नातक की पढ़ाई के साथ-साथ वह इस खूनी खेल का अहम हिस्सा बन गया.

फेसबुक से शुरू हुआ जुर्म का सफर:
पलामू के चैनपुर का रहने वाला अमन सिंह पढ़ाई में तेज था और अकाउंट्स की समझ रखता था. उसने स्वीकार किया कि पैसों के लालच में वह फेसबुक के जरिए सुजीत सिन्हा के संगठन कोयलांचल शांति सेना से जुड़ा. पढ़ा-लिखा होने के कारण उसे लेवी वसूलने, हथियारों का हिसाब रखने और शूटरों के लिए रसद व ठहरने का इंतजाम करने की जिम्मेदारी दी गई.
CST यानी छोटे सरकार टैक्स व्यापारियों में खौफ का नया नाम:
कुबेर के बयान के मुताबिक, जेल में बंद सुजीत सिन्हा और दुबई और पाकिस्तान में छिपे प्रिंस खान ने हाथ मिला लिया है. अमन ने बताया कि पूरे झारखंड में व्यवसायियों, डॉक्टरों, इंजीनियरों और भारतमाला जैसी बड़ी परियोजनाओं से CST’ (छोटे सरकार टैक्स) के नाम पर करोड़ों की रंगदारी मांगी जा रही है. रंगदारी न देने पर दहशत फैलाने के लिए फायरिंग और बमबाजी का जिम्मा अमन और उसके सहयोगियों को दिया गया था.
पाकिस्तान और मध्य प्रदेश से आ रहे हैं घातक हथियार:
अमन के बयान ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं. उसने खुलासा किया कि प्रिंस खान का सहयोगी पठान पाकिस्तान से पंजाब के तरणताल सीमा के जरिए हथियार भेजने की कोशिश में था. जब पंजाब से डील फेल हुई, तो गिरोह ने मध्य प्रदेश के बुरहानपुर से प्रतिबंधित ‘जिगाना और ग्लोक जैसी विदेशी पिस्टल मंगवाई. यही हथियार झारखंड में बड़ी वारदातों में इस्तेमाल हो रहे हैं.
THE-TITOS रेस्टोरेंट कांड और वेटर की हत्या का खुलासा:
अमन ने स्वीकार किया कि एयरपोर्ट थाना क्षेत्र स्थित THE-TITOS रेस्टोरेंट के मालिक राजकुमार गोप से एक करोड़ की रंगदारी मांगी गई थी. पैसा नहीं मिलने पर प्रिंस खान के आदेश पर धनबाद से शूटर बुलाए गए। सात मार्च को शूटरों ने रेस्टोरेंट में घुसकर निर्दोष वेटर मनीष गोप की गोली मारकर हत्या कर दी. इस घटना के लिए भुगतान डिजिटल माध्यमों और बैंक खातों के जरिए किया गया, जिसके पुख्ता सबूत (ट्रांजैक्शन आईडी और पर्चियां) पुलिस को मिल चुके हैं.
जंगी और टेलीग्राम से ऑपरेट हो रहा गिरोह:
पुलिस से बचने के लिए यह गिरोह जंगी, टेलीग्राम और वाट्सअप जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप्स का इस्तेमाल करता है. गिरोह का सदस्य रमन सिंह फर्जी इंटरनेशनल नंबर बनाकर देता था. अमन खुद प्रिंस खान के वॉयस मैसेज और वीडियो को InShot App के जरिए एडिट कर व्यापारियों को भेजता था ताकि वे डर जाएं. बयान में कई नामों का खुलासा हुआ है, जो कथित तौर पर फर्जी पाकिस्तानी पहचान पत्र बनवाकर वहां छिपा है. सुजीत सिन्हा की पत्नी, जो जेल के अंदर से गिरोह के संचालन में मदद करती है. प्रिंस खान के भाई (गोपी, गॉडविन, बंटी), अफजल अमन उर्फ बाबर, विक्की डोम और शूटर सचिन यादव शामिल है.

