रांची : भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने एनटीपीसी (NTPC) की कोयला खनन गतिविधियों में कथित अनियमितताओं को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है. झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता नवीन कुमार सिंह द्वारा अपने मुवक्किल मंटू सोनी उर्फ शनि कांत के माध्यम से भेजे गए लीगल नोटिस और विशेष सूचना दिनांक के आधार पर CAG मुख्यालय ने थीम ऑडिट का आदेश दिया है. यह ऑडिट DGA (Mines) कोलकाता द्वारा वार्षिक ऑडिट प्लान 2025-26 के तहत संचालित किया जा रहा है. इसका मुख्य उद्देश्य एनटीपीसी के कोयला खनन प्रबंधन विशेष रूप से माइनिंग ऑपरेटरों (एमडीओ) के अनुबंधों, उत्पादन लागत, और सुरक्षा मानकों की गहराई से जांच करना है.

क्या है ‘थीम ऑडिट’ और क्यों है महत्वपूर्ण?
सामान्य ऑडिट के विपरीत थीम ऑडिट किसी संगठन के संपूर्ण कामकाज के बजाय एक विशिष्ट विषय या गतिविधि पर गहराई से केंद्रित होता है. एनटीपीसी के मामले में, ऑडिटर्स का पूरा ध्यान कंपनी के ‘कोयला खनन’ (Coal Mining) प्रबंधन पर है. इस प्रक्रिया में एक से अधिक खदानों के डेटा की तुलना की जाती है ताकि प्रक्रियात्मक कमियों और वित्तीय अनियमितताओं को उजागर किया जा सके.
DGA (Mines) द्वारा किए जा रहे इस विशेष ऑडिट में पांच प्रमुख पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है. इस बात की जांच की जा रही है कि क्या आवंटित खदानों से कोयला उत्पादन तय समय सीमा और लक्ष्यों के अनुरूप हो रहा है?कोयला निकालने की लागत (Cost of Production) का बाजार दरों के साथ तुलनात्मक अध्ययन. माइनिंग ऑपरेटरों (MDOs) को ठेके देने में पारदर्शिता और सरकारी नियमों के पालन की समीक्षा. क्या खनन कार्यों में पर्यावरण क्लीयरेंस (EC) के मानकों का कड़ाई से पालन किया जा रहा है?खदानों में कार्यरत श्रमिकों की सुरक्षा और उनके लिए किए गए सुरक्षा उपायों की गुणवत्ता. यह ऑडिट इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसे 02 अप्रैल 2025 को अधिवक्ता नवीन कुमार सिंह द्वारा दी गई विशेष सूचना (लीगल नोटिस) पर टिकी हुई है.

