रांची: झारखंड में किशोरों के स्वास्थ्य और जागरूकता को मजबूत करने के लिए “उमंग दिवस” कार्यक्रम की शुरुआत हो गई है. इसका राज्य स्तरीय शुभारंभ शुक्रवार को नमकुम के आयुष्मान आरोग्य मंदिर, जमचूआ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने किया. यह पहल राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (RKSK) के तहत यूनिसेफ के सहयोग से शुरू की गई है.

कार्यक्रम की शुरुआत काफी उत्साह के साथ हुई. अभियान निदेशक और मौजूद किशोर-किशोरियों ने रंग-बिरंगे गुब्बारे आसमान में उड़ाकर उमंग दिवस की शुरुआत की.
किशोरों को खुलकर बात करने का मिलेगा मौका
“उमंग दिवस” 10 से 19 साल के किशोर-किशोरियों के लिए एक खास मंच है. यहां वे स्वास्थ्य, पोषण, मानसिक तनाव, शरीर में होने वाले बदलाव और जीवनशैली से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बात कर सकेंगे. साथ ही उन्हें सही जानकारी, सलाह और जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य सेवाएं भी मिलेंगी.
Also Read: रांची में बिना लाइसेंस चल रहे लॉज-हॉस्टलों पर सख्ती, 15 मार्च तक आवेदन का अल्टीमेटम
सही उम्र में ही हो शादी – शशि प्रकाश झा
अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि किशोरावस्था ऐसा समय है जब बच्चों के मन में सबसे ज्यादा सवाल आते हैं. अगर उन्हें सही मार्गदर्शन मिले तो वे आगे चलकर जिम्मेदार नागरिक बनते हैं.
उन्होंने कहा कि लड़कियों की शादी 18 साल और लड़कों की 21 साल की उम्र के बाद ही होनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि लड़कियों की पढ़ाई और आत्मनिर्भरता पर भी उतना ही ध्यान देना जरूरी है, जितना लड़कों पर दिया जाता है.
गलत आदतें बनती हैं बीमारी की वजह
उन्होंने किशोरों को चेतावनी देते हुए कहा कि देर रात तक जागना, गलत खान-पान और अनियमित दिनचर्या कई बीमारियों की वजह बनती हैं. इसलिए कम उम्र से ही स्वस्थ जीवनशैली अपनाना जरूरी है.
झारखंड की पहल की यूनिसेफ ने की सराहना
यूनिसेफ झारखंड की प्रमुख डॉ कनिनिका मित्रा ने कहा कि “उमंग दिवस” बच्चों को ऐसा मंच देगा जहां वे बिना झिझक अपनी समस्याएं बता सकेंगे. उन्होंने झारखंड की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे आने वाले समय में किशोरों को बड़ा लाभ मिलेगा.
हर महीने के पहले शुक्रवार को होगा आयोजन
कार्यक्रम के पहले सत्र में किशोरों को किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक बदलाव, पोषण, आयरन की कमी, गैर-संचारी रोग और स्वस्थ जीवनशैली के बारे में जानकारी दी गई.
अब से राज्य के सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिर, स्वास्थ्य केंद्र और स्कूलों में हर महीने के पहले शुक्रवार को “उमंग दिवस” आयोजित किया जाएगा, ताकि किशोर-किशोरियां अपनी समस्याएं साझा कर सकें और सही जानकारी प्राप्त कर सकें.

