रांची: झारखंड में अप्रैल की शुरुआत के साथ ही आसमान से आग बरसने लगी है. अधिकतम तापमान कई जिलों में 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचने को बेताब है. गर्मी की इस शुरुआती दस्तक ने राज्य की लाइफलाइन कहे जाने वाले भूगर्भ जल स्तर को हिला कर रख दिया है. तालाब सूख रहे हैं, कुएं जवाब दे रहे हैं और चापाकल हांफने लगे हैं. स्थिति यह है कि कई जिलों में बोरिंग फेल हो रहे हैं और लोगों को बूंद-बूंद पानी के लिए मीलों का सफर तय करना पड़ रहा है. 600 फीट नीचे भी पानी नहीं मिल रहा है.
क्या है कारण
अत्यधिक दोहन: कंक्रीट के बढ़ते जाल और अनियंत्रित बोरिंग की वजह से धरती का सीना छलनी हो रहा है.
वर्षा जल संचयन का अभाव: रेन वाटर हार्वेस्टिंग के नियमों की अनदेखी के कारण बारिश का पानी सीधे बह जाता है, जिससे भूजल रिचार्ज नहीं हो पाता.
गर्मी का प्रभाव: पारा बढ़ते ही वाष्पीकरण की दर तेज हो गई है और सतही जल स्रोत जैसे तालाब और चेकडैम तेजी से सूख रहे हैं.
सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड की चेतावनी
सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड के अनुसार, यदि जल संरक्षण के ठोस उपाय नहीं किए गए, तो झारखंड के कई जिले डार्क ज़ोन में तब्दील हो सकते हैं. विशेष रूप से रांची और सरायकेला जैसे जिलों में हालात खतरनाक स्तर पर पहुंच चुके हैं. वहीं झारखंड सरकार और स्थानीय प्रशासन ने जल जीवन मिशन के तहत जलापूर्ति योजनाओं में तेजी लाने का दावा किया है, लेकिन धरातल पर गर्मी की चुनौतियों ने इन दावों की परीक्षा शुरू कर दी है.
किस जिले में क्या है भूगर्भ जल की स्थिति
• रांची: राजधानी की स्थिति सबसे चिंताजनक है. यहां भूजल का दोहन क्षमता से अधिक हो रहा है. कई शहरी इलाकों में जलस्तर 150 से 200 फीट तक नीचे चला गया है. डैमों (रुक्का, कांके, धुर्वा) का जलस्तर पिछले साल की तुलना में 2 से 3 फीट कम दर्ज किया गया है.
• सरायकेला-खरसावां: यहां के 85 से अधिक गांवों में जल संकट गहरा गया है. कुछ क्षेत्रों में जलस्तर 350 से 400 फीट और कुचाई जैसे प्रखंडों में 600 से 700 फीट तक नीचे जा चुका है.
• हजारीबाग: हर साल औसतन 6 फीट की दर से जलस्तर गिर रहा है. शहरी क्षेत्रों में 300 फीट वाली बोरिंग भी अब पानी देने में असमर्थ हो रही हैं.
• देवघर: बाबा नगरी में ग्रामीण इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. चापाकल सूखने के कारण लोग नदियों और कुओं के दूषित पानी पर निर्भर होने को मजबूर हैं.
• पलामू और गढ़वा: झारखंड के इस सबसे गर्म इलाके में जलस्तर 80 से 120 मीटर (लगभग 260 से 400 फीट) की गहराई तक पहुंच गया है. पथरीली जमीन के कारण रिचार्ज की प्रक्रिया भी धीमी है.
• धनबाद और बोकारो: औद्योगिक क्षेत्रों और कोयला खदानों के कारण यहां जलस्तर का संतुलन बिगड़ा हुआ है. औसतन 5 से 10 मीटर की वार्षिक गिरावट देखी जा रही है.
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