हजारीबाग: पदमा प्रखंड के ग्राम पंचायत पिंडारकौन से एक हृदयविदारक मामला सामने आया है, जहां एक नाबालिग लड़की के लापता होने के दो महीने बाद भी पुलिस प्रशासन किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सका है. न्याय की उम्मीद में भटक रहे परिजनों का धैर्य अब जवाब दे रहा है.
प्रेम जाल में फंसाकर अपहरण का आरोप:
मामला करीब दो माह पुराना है. परिजनों का आरोप है कि करर गांव निवासी दिवाकर मेहता पिता: तालेश्वर मेहता ने नाबालिग बेटी को शादी का झांसा देकर अपने प्रेम जाल में फंसाया और उसे लेकर फरार हो गया.इस घटना के बाद परिजनों ने तत्काल पदमा ओपी में आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई थी, लेकिन अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है.
अपराधी बेखौफ, परिजन बदहाल:
पीड़िता की मां ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा “हमें डर है कि कहीं मेरी बेटी की हत्या न कर दी गई हो या उसे बेच न दिया गया हो. आरोपी के मामा बिहारी निवासी बिरजू मेहता और चाचा प्रभु मेहता क्षेत्र में बेखौफ घूम रहे हैं, जबकि हम दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं. परिजनों का यह भी आरोप है कि युवक अपहरण के बाद अपने इन रिश्तेदारों के संपर्क में था, फिर भी पुलिस उन तक पहुंचने में नाकाम रही है.
पुलिस की कार्यशैली पर उठते सवाल:
दो महीने यानी 60 दिनों का लंबा समय बीत जाने के बाद भी नाबालिग की बरामदगी न होना स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की गंभीरता पर गंभीर सवालिया निशान लगाता है. ग्रामीणों में भी इस सुस्त कार्रवाई को लेकर भारी आक्रोश है.
अब एसपी की चौखट पर न्याय की उम्मीद:
हार मानकर अब पीड़ित परिवार अगले एक-दो दिनों में हजारीबाग पुलिस अधीक्षक से मिलकर गुहार लगाने की तैयारी में है. परिजनों की मांग है कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले ताकि भविष्य में गांव-मोहल्ले की किसी और बेटी के साथ ऐसी घटना न हो.
