‘अपनी ही आवाज क्यों लगती है अजनबी?’ वॉइस नोट सुनते ही दिमाग में क्यों आता है ये ख्याल, जानिए साइंस

  Lifestyle Desk: क्या आपने कभी खुद का वॉइस नोट सुनकर हैरानी महसूस की है और सोचा है कि ‘क्या मेरी आवाज...

 

Lifestyle Desk: क्या आपने कभी खुद का वॉइस नोट सुनकर हैरानी महसूस की है और सोचा है कि ‘क्या मेरी आवाज सच में ऐसी है?’ ऐसा महसूस करना आम है. कई लोगों को अपनी रिकॉर्ड की हुई आवाज अजीब,पतली या अनजान लगती है.

जब हम बोलते हैं, हमारी आवाज हमें हमेशा भारी और दमदार लगती है, लेकिन जैसे ही वही आवाज फोन में रिकॉर्ड होती है, वह अचानक हल्की और अलग सुनाई देने लगती है. हमारी ही आवाज का यह धोखा हर किसी के साथ होता है. आइए समझते हैं इसके पीछे का विज्ञान.

आवाज बदलने के पीछे का रहस्य

जब हम बोलते हैं, हमारी आवाज हमारे दिमाग तक दो अलग-अलग रास्तों से पहुँचती है. यही वजह है कि हमें अपनी खुद की आवाज वैसी नहीं लगती जैसी दूसरों को सुनाई देती है.

आवाज सुनने के दो तरीके

  • हवा के जरिए: यह वही तरीका है जिससे हम बाकी सभी आवाज़ें सुनते हैं. जब हम बोलते हैं, हमारे मुंह से निकलने वाली साउंड वेव्स हवा में फैलती हैं और कान के पर्दे तक पहुँचती हैं. यही तरीका है जिससे अन्य लोग हमारी आवाज़ सुनते हैं.
  • हड्डियों के जरिए: यह तरीका सिर्फ हमारे लिए होता है. हमारे वोकल कॉर्ड्स जब कंपन करते हैं, तो यह कंपन सिर्फ हवा में नहीं बल्कि खोपड़ी की हड्डियों में भी फैलते हैं. हड्डियों के जरिए आवाज सीधे हमारे कान के अंदर तक पहुँचती है, जिससे हमें अपनी आवाज भारी और गहरी लगती है.

क्यों बदलती है हमारी आवाज जब हम खुद सुनते हैं?

जब हमारी आवाज की साउंड वेव्स खोपड़ी की हड्डियों से गुजरती हैं, तो वे थोड़ी फैल जाती हैं. इसके कारण आवाज की पिच कम लगती है और उसमें भारीपन जुड़ जाता है. इसलिए बोलते समय हमें अपनी आवाज जितनी गहरी और दमदार लगती है, वह असल में उतनी नहीं होती. हमारा दिमाग हड्डियों और हवा से आने वाली आवाज़ को मिलाकर वह स्वर सुनता है जिसे हम अपनी ‘असल’ आवाज़ समझते हैं.

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रिकॉर्डिंग में आवाज कैसे बदलती है?

जब हम अपनी रिकॉर्ड की हुई आवाज सुनते हैं, तो उसमें हड्डियों के जरिए आने वाला भारीपन नहीं होता. रिकॉर्डर सिर्फ वही आवाज पकड़ता है, जो हवा के जरिए बाहर जाती है. क्योंकि हमारे कान उस भारीपन और बेस के आदी होते हैं, इसलिए बिना इसके आवाज हमें अचानक ऊंची, हल्की और अजीब लगने लगती है. ऐसा महसूस होता है कि यह हमारी असली आवाज ही नहीं.

असल आवाज कौन-सी है?

दरअसल, जो आवाज आपको रिकॉर्डिंग में अजीब लगती है, वही वह आवाज है जो बाकी दुनिया सुनती है. अगली बार जब आप अपनी रिकॉर्ड की हुई आवाज सुनें, तो यह समझिए कि यही आपकी असली आवाज है.

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