Sahibganj: जिले में मनरेगा के तहत संचालित योजनाओं में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और अब वे पुरुषों से आगे निकल गई हैं. ग्रामीण महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से पंचायतों में संचालित योजनाओं का सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है.
वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले में कुल रोजगार पाने वालों में महिलाओं की हिस्सेदारी 52 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि पुरुषों को 48 प्रतिशत रोजगार मिला है. यह आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं अब अपने अधिकारों के प्रति अधिक जागरूक हो रही हैं और योजनाओं का लाभ उठा रही हैं.
30 मार्च 2026 तक जिले में कुल 30,51,173 लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया, जिनमें 15,97,883 महिलाएं शामिल हैं. वहीं वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल 26,13,647 लोगों को रोजगार मिला था, जिनमें 13,42,610 महिलाएं थीं. इस प्रकार पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष महिलाओं की भागीदारी में 1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है.
प्रखंडवार आंकड़ों पर नजर डालें तो उधवा प्रखंड में सबसे अधिक 60 प्रतिशत महिलाओं को रोजगार मिला है, जबकि साहिबगंज प्रखंड में यह आंकड़ा सबसे कम 48 प्रतिशत रहा है. इसके बावजूद कुल मिलाकर महिलाएं मनरेगा योजनाओं में पुरुषों से आगे बनी हुई हैं.
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महिलाओं के लिए कारगर साबित हो रही योजनाएं
जिले में मनरेगा के तहत संचालित विभिन्न योजनाएं महिलाओं के लिए प्रभावी साबित हो रही हैं. बिरसा हरित ग्राम योजना के माध्यम से महिलाएं बागवानी और फलदार पौधों की खेती कर अपनी आय बढ़ा रही हैं. वहीं दीदी बाड़ी योजना के तहत पोषण वाटिका में जैविक सब्जियों का उत्पादन कर महिलाएं सब्जियों की बिक्री के जरिए आत्मनिर्भर बन रही हैं.
इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास निर्माण, कूप निर्माण, तालाब निर्माण, नाला निर्माण, भूमि समतलीकरण और मवेशी शेड निर्माण जैसे कार्यों में मजदूरी कर महिलाएं मनरेगा से जुड़कर अपने परिवार की आय में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं.
