हजारीबाग: जिले में सरकारी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जहां स्कूली बच्चों के यूनिफॉर्म सप्लाई का करोड़ों रुपये का भुगतान लंबे समय से लंबित है. मामला दो महिला स्वयं सहायता समूहों से जुड़ा है, जिनकी 69 संथाली महिलाएं पिछले कई वर्षों से अपने मेहनताने के लिए भटक रही हैं.
आठ प्रखंडों में की गई थी बड़ी आपूर्ति
कजरी कॉटन महिला स्वयं सहायता समूह और मारसल प्राथमिक सहयोग समिति लिमिटेड ने मिलकर हजारीबाग के आठ प्रखंडों में कुल 76162 यूनिफॉर्म की आपूर्ति की थी. इनमें बरही, सदर, इचाक, दारू और विष्णुगढ़ सहित कई क्षेत्र शामिल हैं. इसके अलावा चुरचू, डाडी और टाटीझरिया प्रखंडों में भी आपूर्ति की गई थी.
3.82 करोड़ भुगतान पर लटका विवाद
कुल 3 करोड़ 82 लाख 49 हजार 48 रुपये का भुगतान जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय के स्तर पर लंबित है. प्रक्रिया पर सवाल उठने के बाद भुगतान रोक दिया गया था, जिसके बाद मामला न्यायालय तक पहुंचा. कोर्ट ने भुगतान करने का आदेश भी दिया, लेकिन अब तक राशि जारी नहीं की गई है.
कोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं मिली राहत
वर्ष 2023 से लंबित इस मामले में महिलाएं लगातार न्याय की लड़ाई लड़ रही हैं. वर्ष 2025 में हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि बकाया राशि का भुगतान किया जाए, बावजूद इसके स्थिति जस की तस बनी हुई है.
आर्थिक संकट में महिलाएं, बढ़ा कर्ज का बोझ
महिला समूहों का कहना है कि उन्होंने सरकारी योजना के तहत समय पर काम पूरा किया था, लेकिन भुगतान न मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है. कई महिलाएं कर्ज के बोझ तले दब गई हैं और परिवार चलाना मुश्किल हो गया है.
“अब न्याय कहां मिलेगा” – महिलाओं की पीड़ा
समूह की महिलाओं ने सवाल उठाया है कि जब अदालत का आदेश भी लागू नहीं हो रहा, तो उन्हें न्याय के लिए और कहां जाना होगा.
प्रशासन ने जल्द समाधान का दिया आश्वासन
हजारीबाग के उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह ने कहा है कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और भुगतान प्रक्रिया जल्द आगे बढ़ाई जाएगी. उन्होंने आश्वासन दिया है कि एक सप्ताह के भीतर समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा.
