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नीमडीह के तिल्ला टोला जामडीह में हाथियों का उत्पात, ग्रामीणों ने वन विभाग पर उठाए सवाल

  सरायकेला : चांडिल वन क्षेत्र में रविवार की रात हाथियों के झुंड ने भारी उत्पात मचाया. नीमडीह प्रखंड अंतर्गत ग्राम तिल्ला...

 

सरायकेला : चांडिल वन क्षेत्र में रविवार की रात हाथियों के झुंड ने भारी उत्पात मचाया. नीमडीह प्रखंड अंतर्गत ग्राम तिल्ला टोला, जामडीह में गांव निवासी एवं राशन दुकानदार मदन दास के घर को तोड़ दिया गया. दुकान में रखे आटा, आलू सहित अन्य खाद्य सामग्री को हाथियों ने खा लिया, वहीं कंप्यूटर और वजन मशीन को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया.

दूसरी दुकान भी बनी निशाना

गांव के ही सनातन सिंह की दुकान को भी हाथियों ने नुकसान पहुंचाया. यहां रखे आलू को हाथियों ने खा लिया, जिससे ग्रामीणों को आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ा.

जनप्रतिनिधि ने किया दौरा, मुआवजे की मांग

घटना की जानकारी मिलते ही पूर्व जिला परिषद सदस्या अनिता पारित मौके पर पहुंचीं और स्थिति का जायजा लिया. उन्होंने वन विभाग के फॉरेस्टर से दूरभाष पर बातचीत कर घटना की जानकारी दी और प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा देने की मांग की.

ग्रामीणों में आक्रोश, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

घटना के बाद गांव में भय और आक्रोश का माहौल है. ग्रामीणों का आरोप है कि हाथियों के हमले लगातार हो रहे हैं, लेकिन न तो कोई ठोस सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं और न ही कोई प्रभावी योजना लागू हो रही है. उन्होंने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की है.

अवैध आरा मिल और जंगल कटाई पर उठे सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि स्थानीय प्रशासन और वन विभाग को इस मामले में गंभीरता दिखानी चाहिए. उनका आरोप है कि क्षेत्र में अवैध आरा मिलों का संचालन हो रहा है, जिससे जंगलों की कटाई बढ़ रही है और हाथियों का प्राकृतिक आवास प्रभावित हो रहा है.

दलमा क्षेत्र से पलायन की समस्या

दलमा गज परियोजना क्षेत्र से हाथियों का पलायन भी एक बड़ी वजह मानी जा रही है. जंगलों में भोजन की कमी के कारण हाथी अब रिहायशी इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं और ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र में डेरा डाल रहे हैं.

हाथी समस्या के बढ़ने के पीछे क्या कारण?

चाईबासा और मजगांव क्षेत्र में हाल के दिनों में हुई घटनाओं ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है. विशेषज्ञों के अनुसार, हाथियों के पारंपरिक कॉरिडोर के बाधित होने से वे अपने रास्ते से भटक रहे हैं.

जंगलों की कटाई से बढ़ी परेशानी

जांच में यह भी सामने आया है कि चांडिल रेंज कार्यालय के पास अवैध आरा मिल वर्षों से संचालित हो रहे हैं, जो जंगलों की कटाई को बढ़ावा दे रहे हैं. आसपास के गांवों में इसके लिए स्थानीय स्तर पर नेटवर्क भी सक्रिय बताया जा रहा है.

प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने का असर

विशेषज्ञों का मानना है कि हाथी घने जंगलों के बजाय खुले क्षेत्र में रहना पसंद करते हैं. जंगलों की कटाई के कारण उनके आवास में बदलाव हो रहा है, जिससे वे गांवों की ओर आ रहे हैं.

समाधान की दिशा में जरूरी कदम

पिछले दो दशकों में बढ़ती हाथी समस्या को देखते हुए विशेषज्ञ जंगलों के संरक्षण और अवैध कटाई पर रोक को जरूरी मानते हैं. सरकार द्वारा वन्यजीव संरक्षण के लिए संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता है.

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