Hazaribagh : शहर की सड़कों पर ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या के बीच नाबालिगों के हाथों में इन वाहनों का स्टेयरिंग पहुंचने का मामला चिंता बढ़ा रहा है. सामने आई तस्वीरों में 13 से 16 वर्ष तक के किशोरों के ई-रिक्शा चलाने का मामला प्रमुखता से सामने आया है. ऐसे में हजारीबाग में शहर के प्रमुख मार्गों, चौक-चौराहों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में ई-रिक्शा चालकों की उम्र और ड्राइविंग लाइसेंस की जांच की जरूरत महसूस की जा रही है.

ई-रिक्शा भले ही कम गति वाला वाहन माना जाता हो, लेकिन सड़कों पर यातायात के बीच इसे चलाने के लिए चालक का प्रशिक्षित और नियमों से परिचित होना जरूरी है. नाबालिगों के हाथ में स्टेयरिंग होने से अचानक ब्रेक, गलत दिशा में वाहन मोड़ने या यातायात नियमों की अनदेखी जैसी स्थिति में दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है.
सवारी की सुरक्षा भी सवालों में
नाबालिग चालक के साथ ई-रिक्शा में सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण मुद्दा है. यदि चालक के पास वैध लाइसेंस नहीं है और वह यातायात नियमों से पूरी तरह परिचित नहीं है तो किसी भी छोटी गलती का परिणाम गंभीर हो सकता है. खासकर स्कूल-कॉलेज, बाजार और मुख्य सड़कों पर ऐसे वाहनों की नियमित जांच जरूरी है.
जांच अभियान चलाने की मांग
शहरवासियों का कहना है कि ट्रैफिक पुलिस को ई-रिक्शा चालकों की उम्र, लाइसेंस और वाहन के जरूरी कागजात की जांच के लिए विशेष अभियान चलाना चाहिए. नाबालिग पाए जाने पर वाहन मालिक की जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए, ताकि कम उम्र के बच्चों को वाहन चलाने से रोकने के साथ सड़क पर चलने वाले यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके.
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