Hazaribagh: जिले के मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के केसूरा गांव में अपनी जमीन पर काम कराने पहुंचे सेवानिवृत्त DSP मदन मोहन सिन्हा के साथ मारपीट का मामला सामने आया है. मारपीट में रिटायर्ड DSP का एक दांत टूट गया. घटना के बाद घायल मदन मोहन सिन्हा का इलाज शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कराया गया. मामले को लेकर उन्होंने मुफ्फसिल थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी गई है.
काम रोकने को लेकर हुआ विवाद, चार पर मारपीट का आरोप
प्राथमिकी में चार लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है. इनमें सिलवार गांव निवासी किशोरी प्रसाद मेहता, बड़ासी गांव निवासी उमेश मेहता, राजेश मेहता और जागेशर मेहता शामिल हैं. पुलिस को दिए बयान में रिटायर्ड DSP ने बताया कि वे केसूरा गांव स्थित अपनी जमीन पर काम कराने गए थे. इसी दौरान चारों नामजद आरोपी कुछ अन्य लोगों के साथ वहां पहुंचे और जमीन पर चल रहे काम को रुकवा दिया. काम रोकने को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद हो गया. आरोप है कि विवाद के दौरान आरोपियों ने उनके साथ मारपीट शुरू कर दी. मारपीट में उनका एक दांत टूट गया और वह घायल हो गए.

अस्पताल में इलाज, वहीं दर्ज हुआ बयान
घटना के बाद घायल मदन मोहन सिन्हा को इलाज के लिए शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया. अस्पताल में पुलिस ने उनका बयान दर्ज किया. इसी बयान के आधार पर मुफ्फसिल थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है.
पुलिस ने शुरू की मामले की जांच
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद मुफ्फसिल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. पुलिस घटना की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए घटनास्थल पर पहुंची और आसपास के लोगों से पूछताछ की. जमीन पर चल रहे काम को रोकने, दोनों पक्षों के बीच हुए विवाद और मारपीट की घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है.
दो माह पहले रामगढ़ में उप निबंधक की हुई थी हत्या
जमीन विवाद से जुड़ी यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब करीब दो माह पूर्व रामगढ़ में झारखंड सरकार के एक उप निबंधक की भी भूमि विवाद के मामले में हत्या कर दी गई थी. लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं यह सवाल खड़ा करती हैं कि आखिर जमीन विवाद अब किस हद तक गंभीर और हिंसक होता जा रहा है.
झारखंड में अधिकारी भी सुरक्षित नहीं, जमीन विवाद पड़ा भारी
रिटायर्ड DSP के साथ मारपीट और इससे पहले सरकारी अधिकारी की हत्या की घटना को जोड़कर देखें, तो जमीन विवाद को लेकर बढ़ती हिंसा गंभीर चिंता का विषय है. सवाल यह भी है कि जब सरकारी सेवा से जुड़े रहे अधिकारी ही जमीन विवाद में हमले का शिकार हो रहे हैं, तो आम लोगों की सुरक्षा की स्थिति क्या होगी. जरूरत इस बात की है कि जमीन विवाद से जुड़े मामलों में प्रशासन और पुलिस स्तर पर त्वरित कार्रवाई हो, ताकि विवाद हिंसक रूप लेने से पहले ही उसका समाधान किया जा सके. केसूरा की घटना में भी पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि जमीन को लेकर विवाद की वास्तविक वजह क्या थी और मारपीट की घटना में कौन-कौन लोग शामिल थे.

