कांग्रेस बोली, MMDR संशोधन झारखंड के हक पर डाका, रघुवर दास पहले अपने कार्यकाल का दें हिसाब

Ranchi: झारखंड की सियासत में एमएमडीआर संशोधन बिल को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है. झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष...

keshav mahto kamlesh

Ranchi: झारखंड की सियासत में एमएमडीआर संशोधन बिल को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है. झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के उस बयान पर पलटवार किया है, जिसमें उन्होंने इस बिल को ‘राज्यहित’ करार दिया था. कांग्रेस अध्यक्ष ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यह संशोधन झारखंड के खनिज अधिकारों और वित्तीय संप्रभुता पर सीधा हमला है, और रघुवर दास को उपदेश देने से पहले अपने कार्यकाल का हिसाब देना चाहिए.

कांग्रेस का आरोप, राजस्व अधिकारों को किया जा रहा सीमित

कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार कानून के जरिए राज्यों की नीति-निर्धारण क्षमता और राजस्व अधिकारों को सीमित कर रही है.खनिज संपदा केंद्र या भाजपा की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि झारखंड के आदिवासियों और मूलवासियों का हक है.खनन प्रभावित क्षेत्रों की बदहाली के लिए कांग्रेस ने सीधे तौर पर पिछली भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराया.

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खनिज संपदा पर दिल्ली का नियंत्रण बर्दाश्त नहीं

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा के नेता ‘पारदर्शी लीगल माइनिंग’ और ‘90% भुगतान’ की दुहाई देकर जनता को गुमराह कर रहे हैं. असली सवाल यह है कि इस संशोधन के बाद मिनरल बेयरिंग लैंड सेस और खनिज राजस्व की सुरक्षा की कानूनी गारंटी कहां है? उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा का मॉडल साफ है कि खनिज झारखंड का हो, लेकिन फैसले दिल्ली के कॉरपोरेट दरबारों में हों. रघुवर दास  से कहा कि  झारखंड की जनता को उपदेश देने से पहले अपने शासनकाल का हिसाब दीजिए। खनिज संपदा पर झारखंड का अधिकार किसी की मेहरबानी नहीं, बल्कि जनता का हक है. 

भाजपा के सामने रखे  पांच सवाल

  • एमएमडीआर संशोधन से झारखंड के राजस्व अधिकार सुरक्षित रहेंगे, इसकी कानूनी गारंटी क्या है?
  • राज्य के मिनरल बेयरिंग लैंड सेस के अधिकारों को कमजोर क्यों किया जा रहा है?
  • खनन क्षेत्रों के स्थानीय और आदिवासी समुदायों के हितों की रक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?
  • झारखंड की आर्थिक हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए केंद्र ने अब तक क्या ठोस कदम उठाए हैं?
  • यदि बिल राज्यहित में है, तो सभी राजनीतिक दलों के साथ इस पर खुली चर्चा से परहेज क्यों है?

 

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