पलामू: हमारी पार्टी सेक्युलर के पलामू जिला अध्यक्ष और युवा समाजसेवी आशुतोष कुमार तिवारी ने कहा कि झारखंड सरकार ने पलामू जिले के साथ हमेशा सौतेला व्यवहार किया है. कृषि, सिंचाई या रोज़गार के मामलों में पलामू वासियों के प्रति घृणा की भावना झलकती है. जिले के शिक्षित बेरोज़गार युवा नौकरियों की तलाश में कई कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं.
नेताओं की निष्क्रियता और युवाओं की समस्याएं
तिवारी ने कहा कि चाहे भाजपा की सरकार हो या वर्तमान में हेमंत सोरेन की सरकार, पलामू की धरती को पलायन और मजदूरी का गढ़ बनाने में कोई कमी नहीं छोड़ी गई. यहां के सांसद और विधायक युवाओं और छात्रों के मुद्दों पर निष्क्रिय रहे हैं. डाल्टनगंज के विधायक स्वयं युवा होने के बावजूद युवाओं की समस्याओं में रुचि नहीं दिखाते.
शिक्षक पात्रता परीक्षा में भेदभाव
जे-टेट शिक्षक पात्रता परीक्षा के आयोजन के दौरान भी मगही और भोजपुरी विषय को शामिल नहीं किया गया. सरकार का तर्क है कि इससे बिहार और उत्तर प्रदेश के लोग नौकरी में शामिल हो जाएंगे. इसी तरह, उर्दू भाषा को भी नजरअंदाज किया गया, जिससे मुस्लिम समाज के बच्चों को शिक्षक बनने का अवसर नहीं मिल पा रहा. तिवारी ने इसे मुस्लिम विरोधी रवैये के रूप में देखा.
पार्टी सेक्युलर का दृढ़ संकल्प
आशुतोष कुमार तिवारी ने कहा कि पलामू जिले के सभी युवा भाइयों और बहनों के हक और अधिकार के लिए हम पार्टी सेक्युलर हमेशा तत्पर है. सरकार का भाषा और क्षेत्र के आधार पर भेदभाव करना संविधान और समान अवसर के अधिकार के खिलाफ है, जिसे पार्टी कड़े शब्दों में निंदा करती है.
