Sahibganj: आजादी के महानायक सिद्धू-कान्हू की जयंती भोगनाडीह में उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाई गई. इस अवसर पर वंशज मंडल मुर्मू और ग्राम प्रधान बबलू हसदा के नेतृत्व में भोगनाडीह स्थित सिद्धू-कान्हू की प्रतिमा, बाबूपुर के शहीद स्थल, मांझीथान और जाहेरथान जैसे धार्मिक स्थलों पर पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाज से पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया गया.
धार्मिक स्थलों पर माल्यार्पण, पारंपरिक रीति से पूजा
कार्यक्रम के दौरान मांझी बाबा ने सभी को बारी-बारी से पूजा-अर्चना कराई. इसके बाद शहीद स्थल बाबूपुर पहुंचकर वीरों को नमन किया गया. पूरे क्षेत्र में “सिद्धू-कान्हू अमर रहें” और “चांद-भैरव अमर रहें” जैसे नारों से वातावरण गूंज उठा.
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वंशजों ने याद किया बलिदान, प्रेरणा लेने की अपील
वंशज सह भाजपा नेता मंडल मुर्मू ने कहा कि देश की आजादी की पहली लड़ाई भोगनाडीह से शुरू हुई थी, जिसमें हजारों आदिवासी और गैर-आदिवासी शामिल हुए थे. उन्होंने बताया कि पंचकठिया का वह पेड़ आज भी इस बात का गवाह है, जहां सिद्धू-कान्हू को फांसी दी गई थी. उस समय न आधुनिक हथियार थे, न संचार के साधन, फिर भी लोगों में देशभक्ति और बलिदान की अद्भुत भावना थी.
उन्होंने कहा कि जब-जब आदिवासियों पर शोषण और अत्याचार हुआ, तब-तब सिद्धू-कान्हू जैसे क्रांतिकारी योद्धाओं ने संघर्ष किया. आज जरूरत है कि उनके बताए रास्ते पर चलकर समाज के उत्थान के लिए सभी लोग आगे आएं. इस अवसर पर राजा हसदा समेत कई लोग उपस्थित रहे.
